निवेशकों के 20 हजार करोड़ रुपये किस तरह लौटाए जाएंगे, इस मसले पर सहारा समूह अभी तक सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाया है। जमानत पाने के लिए सुब्रत रॉय की कोशिशें अब तक विफल साबित हुई हैं।
सहारा एक भी ऐसा प्रस्ताव पेश नहीं कर सका है, जो कि सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिला सके कि निवेशकों से ली गई मोटी रकम वह सेबी को लौटा देगा।
ऐसे में नौ अप्रैल को अगली सुनवाई में सुब्रत रॉय का भविष्य तय होगा कि उन्हें जमानत मिलती है या उन्हें और इंतजार करना पड़ेगा।
सुब्रत रॉय चार मार्च से तिहाड़ जेल में हैं। इस दौरान सहारा ने जो भी प्रस्ताव दिए, उसे न्यायालय ने नकार दिया।
सहारा ने अपने कर्मचारियों से मांगी मदद
पहले प्रस्ताव के तहत सहारा ने कहा था कि वह तीन दिन के अंदर 2500 करोड़ रुपये चुका देगा। जबकि शेष राशि वह हर तीन महीने की किश्त के आधार पर चुकाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सहारा सम्माननीय प्रस्ताव लेकर आए, उसके बाद ही सुनवाई होगी।
इस बीच सहारा ने अपने कर्मचारियों तक से अपील की कि वह अपनी तरफ से सहारा प्रमुख को रिहा कराने के लिए आर्थिक सहयोग करें।
हाल ही में सहारा ने अपनी वित्तीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने कर्मचारियों को मार्च 2014 के वेतन में देरी की भी बात कही है।
ठोस प्रस्ताव न मिलने पर नहीं मिली जमानत
सहारा की तरफ से बेहतर प्रस्ताव न आने पर सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च की सुनवाई में सुब्रत रॉय की जमानत के लिए शर्त रखी कि सहारा समूह 5000 करोड़ रुपये तुरंत जमा करे और 5000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी दे।
इसी मसले पर तीन अप्रैल को सुनवाई के दौरान सहारा 2500 करोड़ रुपये तुरंत देने और बाकी के 2500 करोड़ रुपये राय के रिहा होने के 21 दिन बाद देने का प्रस्ताव रख चुका है।
कोर्ट ने अभी तक सहारा की जमानत के लिए आये सभी प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया है, कोर्ट का कहना है कि निवेशकों का पैसा वापस करने के लिए वह कोई ठोस प्रस्ताव दें। जिसमें सहारा असफल रहे हैं।
ये है पूरा मामला
सहारा समूह की दो कंपनी सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा ओएफसीडी लाने के फैसले से सामने आया।
जांच के दौरान सेबी ने जून 2011 में कहा कि सहारा नियमों का उल्लंघन कर रहा है। यह मामला सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल से होते हुए उच्चतम न्यायालय पहुंचा।
अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा को आदेश दिया कि वह सेबी को 90 दिन के भीतर 24 हजार करोड़ रुपये लौटाए।
सहारा पर पैसे लौटाने में देरी का आरोप लगा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय को गिरफ्तार कर 20 हजार करोड़ रुपये लौटाने की कवायद शुरू की।