लखनऊ। केजीएमयू में मरीज को निजी अस्पताल भेजने के मामले में आरोपी डॉक्टर पर शनिवार को कोई कार्रवाई नहीं हुई। केजीएमयू प्रशासन ने डॉक्टर को नोटिस तक जारी नहीं किया है। अधिकारी इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
केजीएमयू में मरीजों की दलाली के कई मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद बॉन्ड के तहत तैनात डॉक्टरों की निगरानी के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनी है। निजी प्रैक्टिस और मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने पर प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं है। केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह के अनुसार, मामले की जांच कराई जा रही है। साक्ष्य मिलने पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ये था मामला
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग में इलाज के लिए लाया गया था। आरोप है कि बॉन्ड के तहत तैनात एसोसिएट प्रोफेसर ने उन्हें फेफड़े में संक्रमण बताकर दुबग्गा के फाह हॉस्पिटल भेज दिया। आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद वहां करीब एक लाख रुपये वसूले गए और इलाज के दौरान पुष्पा की मौत हो गई। बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली का आरोप लगाया है।
आयुष्मान मरीज से वसूली पर जांच होगी
मरीज के आयुष्मान कार्ड धारक होने के बाद भी निजी अस्पताल में शुल्क वसूलने का आरोप है। दुबग्गा के फाह हॉस्पिटल पर भी शिकंजा कसेगा। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि जांच कराई जा रही है। आयुष्मान मरीज से रुपये लेना नियमों के खिलाफ है। जांच में आरोप सही मिले तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हुई घटनाएं
केस -1 : 20 जून 2026 को केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में बॉन्ड के तहत तैनात डॉक्टर ने अंबेडकरनगर निवासी कमलेश देवी को कृष्णानगर के निजी हॉस्पिटल में शिफ्ट कराया था। जहां मरीज की हालत गंभीर हो गई थी और उसे दोबारा ट्रॉमा में भर्ती कराया गया था। मगर मरीज की मौत हो गई थी। जांच के बाद डॉक्टर को हटा दिया गया था।
केस- 2 : नवम्बर 2024 में केजीएमयू के ईएनटी विभाग के डॉक्टर पर लखीमपुर खीरी निवासी पूनम मौर्य (32) को जल्दी ऑपरेशन का झांसा देकर खदरा के निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत गंभीर हो गई थी। मरीज को दोबारा केजीएमयू में भर्ती किया गया था। जहां उसकी मौत हो गई थी। आरोपी डॉक्टर को नौकरी से हटा दिया गया था।