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नीति आयोग के उपाध्यक्ष बोले- 2047 में भारत बन सकता है आर्थिक महाशक्ति

Wed, 23 Jan 2019 08:28 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार - फोटो : अमर उजाला
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा है कि विकास को जनांदोलन बनाने से ही देश विकसित होगा। देश की प्रगति के लिए हर व्यक्ति को योगदान देना होगा। जनता चाहेगी तो आजादी के शताब्दी वर्ष 2047 में भारत 70 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के साथ विश्व का पहला या दूसरा सबसे बड़ा विकसित देश होगा। 
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वे मंगलवार को लविवि की ओर से अटल कन्वेंशन सेंटर में ‘भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रतिमान परिवर्तन, बेहतर समावेश के साथ विकास के नवीन कारक’ विषयक राष्ट्रीय सेमिनार में बोल रहे थे। तीन दिनी सेमिनार का मंगलवार को पहला दिन था।

उन्होंने कहा कि जनता को ऐसे मुद्दों पर मंथन करना होगा जो हमें विकसित होने से रोक रहे हैं। देश ऐसे मुहाने पर है कि अगर हर व्यक्ति ने विकास पर ध्यान दे दिया तो 2047 में भारत दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है। 
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नोटबंदी से देश को कई क्षेत्रों में आर्थिक फायदा भी हुआ है। मोदी सरकार की पारदर्शी व जवाबदेह नीति से साढ़े चार वर्ष में डीबीटी स्कीम से 90 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई है। जीएसटी और रेरा से जनता को फायदा हुआ है। 
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प्रदेश के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि यूपी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्र्रदेश में किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें फूड प्रोसेसिंग उद्योग से जोड़ा जा रहा है। 98 लाख बिजली कनेक्शन दिए है। मुद्रास्फीति जहां 4 फीसदी से कम हुई है, वहीं आने वाले समय में जीडीपी 10 फीसदी तक बढ़ेगा। सेमिनार को सीसीए यूनिवर्सिटी मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा, सीबीटी यूनिवर्सिटी नोएडा के कुलपति प्रो. बीपी शर्मा ने भी संबोधित किया।

प्रदेशों के बीच होने लगी है प्रतिस्पर्धा
राजीव ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को लेकर राज्यों के बीच अब प्रतिस्पर्धा होने लगी है। सुशासन और निवेश आमंत्रण के लिहाज से यह शुभ संकेत है। उन्होंने कहा कि युवाओं के हुनर को और तराशने के उद्देश्य से स्कूलों में मार्च तक पांच हजार अटल इनोवेशन लैब बनाने का लक्ष्य है।

अफसरशाही से नाराज शिक्षक
लविवि के डॉ. शंकर दयाल शर्मा लोकतंत्र संस्थान के निदेशक डॉ एमके अग्रवाल ने कहा कि अगर प्रोफेसर प्रशासनिक अधिकारियों के पास जाते हैं तो उनके पास मिलने का समय नहीं होता है। जबकि दक्षिण भारत के राज्यों में कोई भी प्रोफेसर किसी ब्यूरोक्रेट्स के पास जाता है तो पूरा सम्मान मिलता है।

 
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