हिंदू पक्षकार राजा रामचंद्राचार्य ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा ने जमीन बेचकर मुकदमा लड़ा है। यदि हम हाईकोर्ट न गए होते थे तो 2.77 एकड़ भूमि मुस्लिमों के पास चली जाती। बावजूद इसके निर्मोही अखाड़ा की सरकार द्वारा घोर उपेक्षा की गयी है। ट्रस्ट गठन में मनमानी हुई। पंचों से राय नहीं ली गई।