नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाईपर) रायबरेली के लखनऊ कैंपस की ओर से
देश के औषधि नियंत्रक महानिदेशक डॉ. राजीव रघुवंशी के मुताबिक फॉर्मा क्षेत्र में भी नवाचार की जरूरत है। इन नवाचार का इस्तेमाल बुजुर्गों के लिए बेहद सुविधाजनक होगा। नवाचार के माध्यम से बुजुर्गों को घर पर ही सेल्फ इंजेक्शन की सुविधा मिलनी चाहिए। महानिदेशक सोमवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाईपर) रायबरेली के लखनऊ कैंपस की ओर से आयोजित सेमिनार में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन कानपुर रोड स्थित होटल में किया गया। महानिदेशक ने कहा कि इंजेक्शन की ही तरह बुजुर्गों को अलग-अलग कई गोलियां खाने की बजाय एक ही पाउच या गोली में पूरी खुराक उपलब्ध कराई जा सकती है। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों को इन नवाचार से बड़ी सुविधा मिलेगी। कार्यक्रम में विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने मिलकर यह चर्चा की कि किस तरह नए नवाचारों से बुजुर्गों का इलाज आसान बनाया जा सकता है। नाईपर रायबरेली की निदेशक प्रो. शुभिनी ए साराफ ने कहा कि देश में बुजुर्गों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि हम बुजुर्गों के लिए सुरक्षित, असरदार और आसानी से उपलब्ध होने वाले इलाज पर ध्यान दें।
थ्रीडी प्रिंटिंग से मुंह में रखते ही घुल जाएगी दवाई
डॉ. राजीव रघुवंशी ने दवा उद्योग से अपील की कि बुजुर्गों की देखभाल के लिए दुनिया में हो रहे नए नवाचारों को अपनाए। अमेरिका और कई देशों में थ्रीडी प्रिंटिंग से बनी मुंह में घुलने वाली गोलियां दी जा सकती हैं। इसी तरह दवा–चिप सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सिस्टम में दवा में लगी चिप मोबाइल ऐप से जुड़कर बुजुर्ग मरीजों को समय पर दवा लेने की याद दिलाती है।
योग से नियंत्रित हो सकती हैं 117 तरह की बीमारियां
कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. बीएन गंगाधर ने कहा कि योग करने से 117 तरह की बीमारियों को नियंत्रित रखा जा सकता है। इसलिए बुजुर्गों को स्वस्थ जीवन के लिए योग को अपनाना चाहिए। इससे वे रोगमुक्त हो सकेंगे।