यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ
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प्रदेश के सभी जिलों में मिल रही डायलिसिस की निशुल्क सुविधा
योगी सरकार में प्रदेश में 75 जिलों के अस्पतालों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे 41.46 लाख से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। जिलों में सीटी स्कैन सेवा शुरू की गई है। दूरदराज के क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने के लिए योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की, जिससे दवाओं की गुणवत्ता और आपूर्ति में पारदर्शिता आई है। साथ ही, 798 स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है। खाद्य सुरक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं। 36 मोबाइल प्रयोगशालाओं के माध्यम से खाद्य पदार्थों की जांच की जा रही है।
लखनऊ, मेरठ और वाराणसी में माइक्रोबायोलॉजी लैब स्थापित कर खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को मजबूत किया गया है। फार्मास्यूटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए ‘प्रमोद फार्म’ संस्था की स्थापना भी की गई है। इसके अलावा, प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस चिकित्सा योजना लागू की गई है, जिससे उन्हें कैशलेस इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, विभिन्न विभागों से जुड़े लाखों परिवारों को भी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में शामिल किया गया है।
142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके।
ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी।
सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी
ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा।
गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी।
जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम
जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।