राजधानी लखनऊ में लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों और जमातियों के लिए बनाई गई अस्थायी जेल से गुरुवार को आंध्र प्रदेश की एक महिला सहित नौ लोगों रिहा कर दिया गया।
एक अंग्रेजी समाचार वेबसाइट पर प्रकाशित खबर के मुताबिक आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले की रहने वाली महिला का बीते दिनों ही गर्भपात हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने महिला और उसके पति को गुरुवार को रिहा कर दिया।
महिला के पति मोहम्मद रफी ने कहा कि उसकी पत्नी पहली बार जमात में शामिल हुई थी। इस दौरान हमने अपना बच्चा खो दिया। अब हम यहां से सीधे अपने घर (गुंटूर) जाएंगे।
रफी ने बताया कि उसकी पत्नी रिजवाना और अन्य आठ लोगों को तीन अप्रैल को लॉकडाउन के उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद हम सभी को क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया।
इसके बाद तीन मई को हम सभी को श्रीराम स्वरूप कॉलेज में बनाए गए अस्थायी जेल में शिफ्ट कर दिया गया। इस बीच मेरी पत्नी गर्भवती थी तो मैंने पुलिस वालों से कई बार पूछा कि हमें कब रिहा किया जाएगा। हर बार एक ही जवाब मिलता था कि आज कर देगें कल कर देंगे।
इस बीच 9 मई को मेरी पत्नी का गर्भपात हो गया। मैंने बहुत कोशिश की मदद मांगने की लेकिन किसी ने भी हमारी मदद नहीं की। मैं बार-बार रिजवाना को डॉक्टर के पास ले जाने के लिए कहता रहा लेकिन किसी ने भी हमारी मदद नहीं की।
लखनऊ के तब्लीगी जमात प्रमुख मोहम्मद अनीस ने कहा कि ये यहां जमात में शामिल होने के लिए आए थे। इन्होंने इन दिनों बहुत तकलीफें सही हैं। इन्होंने अपना बच्चा खो दिया। मैं इन लोगों की रिहाई पर खुश हूं।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इनकी रिहाई की पुष्टि करते हुए कहा कि हमें मेडिकल लापवाही की कोई शिकायत नहीं मिली है।