प्रदेश में 8700 करोड़ के नौ नए मेगा प्रोजेक्ट स्थापित होंगे। इनमें सीमेंट, आईटी, दुग्ध, उर्वरक व पैकेजिंग से जुड़ी इकाइयां शामिल हैं।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। मेगा प्रोजेक्ट के रूप में इन्हें क्या-क्या खास सुविधाएं दी जाएं, इसे जल्द कैबिनेट से मंजूरी मिलेगी।
इसके अलावा 20 अन्य निवेशकों ने 22 परियोजनाएं लगाने का प्रस्ताव सरकार को दिया है। मुख्य सचिव रंजन ने शनिवार को अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की उपलब्धियों और आगे की निवेश योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 में 200 से 500 करोड़ व 500 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं मेगा प्रोजेक्ट में आती हैं।
इसके अंतर्गत निवेशकों से नौ प्रोजेक्ट स्थापित करने के प्रस्ताव सरकार को प्राप्त हुए हैं। इनमें 8700 करोड़ का निवेश होगा।
उन्होंने बताया कि इनको दी जाने वाली सुविधाओं से जुड़े प्रस्ताव कैबिनेट से जल्दी ही मंजूरी दिलाई जाएगी।
ढाई साल में 14600 करोड़ का हुआ निवेश
उन्होंने बताया कि सरकार प्रदेश की विकास दर और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने को ध्यान में रखकर तेजी से काम कर रही है।
इसके लिए पहले नीतियां बनाई गईं। शासनादेश जारी किए गए। पिछले कुछ समय से इसके अंतर्गत निवेश को जमीन पर लाने का काम किया जा रहा है।
इसके नतीजे नजर आने लगे हैं। जो नए प्रोजेक्ट स्थापित होंगे उससे पूर्वी यूपी, बुंदेलखंड व मध्य यूपी को खास फायदा होगा।
प्रदेश सरकार की नई नीतियों के असर का हवाला देते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि बीते ढाई साल में सूबे में 14600 करोड़ का निवेश हुआ है।
इसके अंतर्गत 96041 नए उद्योग लगे हैं। 7.76 लाख लोगों को प्रत्यक्ष व 1.49 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। मुख्य सचिव ने दावा किया कि दिल्ली के निवेश सम्मेलन में जिन 20 निवेशकों ने 22 परियोजनाओं के लिए एमओयू किया उन सभी के काम छह महीने में जमीन पर नजर आने लगेंगे।
54 करोड की परियोजनाओं के आए प्रस्ताव
मुख्य सचिव ने बताया कि 54 हजार करोड़ की परियोजनाओं में निवेश के लिए रिलायंस, आईटीसी, एस्सेल, सोनालिका ट्रैक्टर्स, एमिटी, फोर्टिस, गेल, जेपीएल, एग्रो, डंकन गोयनका, श्री सीमेंट समूह के प्रस्ताव आए हैं।
ये आटो कंपोनेंट, ट्रैक्टर, खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा वितरण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, उच्च शिक्षा, सौर ऊर्जा, स्वास्थ्य सुरक्षा व टेलीकॉम सेक्टर में काम करेंगे।
इसके अलावा अमूल की लखनऊ व कानपुर यूनिट का जमीन पर काम इसी महीने शुरू हो जाएगा। 5-5 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता की यूनिट लगेंगी। वाराणसी में जमीन देने की कार्यवाही चल रही है।
प्रदेश सरकार ने यमुना एक्सप्रेस वे पर प्रदेश का पहला सेल्युलर फोन कंपोनेंट्स केंद्र की स्थापना का फैसला किया है। यह 100 एकड़ जमीन पर स्थापित होगा। इसमें 1000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है।