सरकारी अस्पतालों के एनआईसीयू और एसएनसीयू यूनिट पूरी तरह फुल हो चुकी है। अस्पताल पहुंचने वाले नवजात बच्चों की भर्ती मुश्किल हो रही है।
गंभीर बच्चों को वार्ड में भर्ती कर बारी-बारी से शिफ्टिंग में उनका इलाज किया जा रहा है। अस्पतालों में बेड की कमी के चलते उनको केजीएमयू रेफर किया जा रहा है।
चिनहट, मटियारी के रहने वाले बृजेश कुमार की पत्नी शोभा (28) का कुछ दिन पहले निजी नर्सिंग होम में प्रसव हुआ था।
दो दिन बाद नवजात को सांस लेने में दिक्कत हुई तो मंगलवार को डॉक्टरों ने लोहिया के लिए रेफर कर दिया।
वहां पहुंचने पर आठ बेड की नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट पूरी तरह फुल मिली। डॉक्टरों ने उन्हें केजीएमयू जाने की सलाह दी।
बृजेश ने केजीएमयू जाने से पहले झलकारीबाई और डफरिन अस्पताल के एनआईसीयू और एसएनसीयू यूनिट में बेड के स्टेटस की जानकारी ली तो वहां भी बेड फुल होने की जानकारी दी गई।
इसके बाद वो नवजात को लेकर केजीएमयू पहुंचे जहां उसे दोपहर करीब दो बजे भर्ती किया गया।
वहीं, डफरिन अस्पताल के एसएनसीयू के इंचार्ज डॉ. सलमान खान बताते हैं कि अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों की भर्ती प्रमुखता से होती है।
इसके बाद सीएचसी और बीएमसी में जन्म लेने वाले नवजात को भर्ती किया जाता है। प्राइवेट अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों को क्रिटिकल कंडिशन में भर्ती किया जाता है।