इस सड़क को बिल्ड, ऑपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) मोड में फोरलेन करने के लिए वर्ष 2010 में टेंडर किए गए थे। सीतापुर से बरेली के बीच फॉरेस्ट और प्रदेश सरकार की एनओसी न मिलने के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लटकता गया। बाद में कॉन्ट्रैक्ट लेने वाली कंपनी एरा इन्फ्रा को एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल) ने दिवालिया घोषित कर दिया।
नतीजतन, बैंक से मिलने वाली और प्रस्तावित सहायता बंद हो गई। अप्रैल 2019 में पूरा अनुबंध ही रद्द हो गया। अब इस सड़क के निर्माण के लिए 900 करोड़ रुपये की जरूरत है।
वर्तमान में सीतापुर से बरेली के बीच 157 किलोमीटर लंबी रोड बेहद खस्ताहाल है। बारिश के कारण इतनी ज्यादा स्थानों पर सड़क कट चुकी है कि वाहनों के संचालन में बड़ी दिक्कत आ रही है। 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर भी वाहनों के पलटने का डर बना रहता है।
शाहजहांपुर, सीतापुर और रास्ते में पड़ने वाले कई कस्बों के कारोबारी बताते हैं कि अतिरिक्त किराए के भुगतान पर ही ट्रांसपोर्टर्स उनके यहां माल भेजने के लिए तैयार होते हैं। इस 157 किमी लंबी सड़क पर शायद ही कोई दिन जाता हो, जिस दिन वाहन दुर्घटनाग्रस्त न होते हों।