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Lucknow News: भूजल संकट पर एनजीटी सख्त, हर ब्लॉक का मांगा हिसाब

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प्रतीकात्मक तस्वीर।  - फोटो : स्रोत : एआई तस्वीर
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लखनऊ। राजधानी में तेजी से गिर रहे भूजल स्तर ने अब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की चिंता बढ़ा दी है। एनजीटी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) से लखनऊ के हर ब्लॉक की भूजल प्रबंधन योजना और जिला प्रशासन की अब तक की कार्रवाई का जमीनी सत्यापन करके रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी।
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हर ब्लाॅक की रिपोर्ट होगी पेश
एनजीटी ने अपने 19 मार्च 2026 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सीजीडब्ल्यूए को लखनऊ के प्रत्येक ब्लॉक की भूजल प्रबंधन योजना की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही जिलाधिकारी की ओर से भूजल संरक्षण और अवैध दोहन रोकने के लिए की गई कार्रवाई का जमीनी सत्यापन कर शपथपत्र के साथ रिपोर्ट भी देनी होगी।

हर साल नीचे खिसक रहा भूजल
सरकारी आकलन के अनुसार लखनऊ के कई हिस्सों में भूजल स्तर हर वर्ष औसतन डेढ़ से पांच फीट तक नीचे जा रहा है। जिन इलाकों में दो दशक पहले 40 से 50 फीट गहराई में पानी मिल जाता था, वहां अब कई स्थानों पर 150 से 300 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है।
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पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक कुमार सिंह के मुताबिक गोमतीनगर, अलीगंज और चिनहट जैसे इलाके पानी के सर्वाधिक दोहन वाली श्रेणी में पहुंच चुके हैं, जबकि सरोजनीनगर और बख्शी का तालाब गंभीर श्रेणी में हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, व्यावसायिक बोरवेल, वर्षा जल संचयन की अनदेखी और पारंपरिक तालाबों पर अतिक्रमण के कारण भूजल संकट और गहराता जा रहा है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि भूजल की वर्तमान स्थिति पर केवल कागजी दावे पर्याप्त नहीं होंगे। ब्लॉकवार योजनाओं और जिला प्रशासन की रिपोर्ट का जमीनी सत्यापन भी कराया जाएगा। ऐसे में सितंबर की सुनवाई में यह साफ होगा कि भूजल संरक्षण के लिए सरकारी एजेंसियों ने वास्तव में कितनी प्रभावी कार्रवाई की है।

फैक्ट फाइल : लखनऊ में भूजल की स्थिति
क्षेत्र/ब्लॉक वर्तमान स्थिति प्रमुख कारण
गोमतीनगर, अलीगंज सहित शहरी क्षेत्र सर्वाधिक दोहन व्यावसायिक बोरवेल, बहुमंजिला निर्माण, कंक्रीटीकरण
चिनहट सर्वाधिक दोहन औद्योगिक उपयोग, तेज आवासीय विस्तार
सरोजनीनगर गंभीर उद्योग और शहरी फैलाव
बख्शी का तालाब (बीकेटी) गंभीर कृषि व नए आवासीय प्रोजेक्ट

चिंताजनक आंकड़े
भूजल स्तर में गिरावट : डेढ़ से पांच फीट प्रति वर्ष
दो दशक पहले भूजलस्तर : 40–50 फीट गहराई तक
वर्तमान समय में भूजलस्तर : 150–300 फीट गहराई तक

क्या है एनजीटी के इस आदेश के मायने
एनजीटी का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकरण केवल औपचारिक रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। एनजीटी ने पूरे जिले की सामान्य रिपोर्ट के बजाय चिनहट, काकोरी सहित प्रत्येक ब्लॉक के लिए अलग-अलग भूजल प्रबंधन योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जिससे हर क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उसके अनुरूप किए जा रहे उपायों का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
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