लखनऊ। मेटाफर लिटफेस्ट के दूसरे व अंतिम दिन किस्से, कहानियों और कविताओं के बीच संस्कृति, साहित्य, सिनेमा, अध्यात्म, पुस्तकों, क्राइम, अंडरवर्ल्ड व गोमती जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। उन्हें सुनने के साथ ही दर्शकों ने लखनवी जायकों का भी लुत्फ उठाया। इस दौरान लखनऊ के 250 सालों के इतिहास पर चर्चा के साथ ही यहां की तहजीब, जुबान और खानपान पर भी बात हुई।
मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने कहा कि माफिया डॉन दाउद इब्राहिम पाकिस्तान में हो या किसी और देश में लेकिन उसके मरने की खबर बहुत दिनों तक छिपाई नहीं जा सकती। मेटाफर लिटफेस्ट में एक सत्र को संबोधित करने के बाद अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर यह भ्रम नहीं करना चाहिए कि केवल वही लोग आतंकवाद की राह पकड़ रहे हैं जो अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे हैं। पिछले दिनों की कई घटनाएं बताती हैं कि इंजीनियर और डॉक्टर तक ब्रेन वॉश के बाद आतंक की राह पकड़ रहे हैं जो अधिक खतरनाक है।
इससे पहले उन्होंने सत्या सरन के साथ बातचीत में अपनी पुस्तक ‘व्हेन इट ऑल बिगन’ पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अंडरवर्ल्ड के माफिया हाजी मस्तान से लेकर वरदराजन मुदलियार, करीम लाला और दाउद इब्राहिम व उनके गिरोहों के बारे में कई रोचक किस्से बताए। उन्होंने बताया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया था कि वरदराजन मुंबई वापस न लौटे। आलमजेब और शहजादा के नेतृत्व वाला पठान गिरोह, दाउद के सूत्र और उसके पिता कांस्टेबल इब्राहिम कास्कर के अलावा मारिया ने मुंबई पुलिस की 1982 में हुई पहली मुठभेड़, 1986 में चार्ल्स शोभराज की गिरफ्तारी जैसे महत्वपूर्ण क्षणों के बारे में भी बताया और कहा कि कैसे इन घटनाओं ने अंडरवर्ल्ड में सत्ता के संतुलन को बदल दिया।
आंगन की आवाजें... में गूंजीं कविताएं
आंगन की आवाजें नामक सत्र में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की प्रधान संपादक अमिता दुबे, कवयित्री तोषणी और नमिता सुंदर सचान के साथ बातचीत की लोहिया राष्ट्रीय विधि विवि की शिक्षिका डॉ. अलका सिंह ने। अलका सिंह ने अपनी कविता आंगन का पाठ किया। अन्य कवयित्रियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से स्त्री की संवेदनशीलता को उजागर किया। पद्मश्री विद्या विंदु सिंह ने सभी को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। 80 के दशक पर सिनेमा को लेकर अविजित घोष के साथ मेटाफर की संस्थापक कनक रेखा चौहान ने वार्ता की।
मास्टर ऑफ रिंग में राष्ट्र की दुर्दशा दिखाने का प्रयास : मास्टर ऑफ रिंग पुस्तक पर लेखक पूर्व डीजी सीआरपीएफ डॉ. एपी माहेश्वरी के साथ चर्चा में शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार अतुल चंद्रा। डॉ. एपी माहेश्वरी ने बताया कि यह एक वास्तविक जीवन की कहानी है जो कई अधूरी सच्चाइयों को उजागर करती है। उन्होंने बताया कि किताब में राष्ट्र की दुर्दशा को उजागर करने का प्रयास किया है। खास बात है कि किताब के पात्र जानवर हैं लेकिन असल दुनिया में वे पुरुष और महिलाएं हैं। वे मंत्री, विधायक, नौकरशाह, न्यायाधीश, पुलिसकर्मी या अन्य लोग हैं। इस सारी गड़बड़ी के लिए वे सभी जिम्मेदार हैं। अपने निजी या राजनीतिक लाभ के लिए, उन्होंने खेल के नियम बदल दिए हैं, ठीक वैसे ही जैसे जंगल के शक्तिशाली जानवर करते हैं।
लखनऊ के साथ मुंशी नवल किशोर के योगदान पर चर्चा : 250 इयर्स ऑफ टाइमलेस लखनऊ नामक सत्र में पीसी सरकार, पंकज भदौरिया, आभा सिंह और आईएएस पार्थसेन शर्मा ने लखनऊ की संस्कृति पर चर्चा की। एक अन्य सत्र में नीता दुबे, गौरव वत्स, किस्सागो हिमांशु बाजपेई और आमना ने चंदर प्रकाश के साथ चर्चा में मुंशी नवल किशोर के योगदान पर चर्चा की। इसके अलावा धनुष यज्ञ की काव्यात्मक प्रस्तुति ने दर्शकों को खास प्रभावित किया जिसका निर्देशन शुभम तिवारी ने किया और अभिनय विनीता मिश्रा व पल्लवी राज ने किया। एक अन्य सत्र कही न जाए का कहिये... में कालजयी रचनाकार भगवती चरण वर्मा के कृतित्व व व्यक्तित्व पर शायर चंद्रशेखर वर्मा के साथ वार्ता में शामिल हुईं दिव्या भारद्वाज।
गोमती संवाद में समाजसेविका दीपिका चतुर्वेदी ने कहा कि गोमती सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि यह लखनऊ की जीवनरेखा है। यहां के लोग गोमती को एक जीवित प्राणि और स्तुति के पात्र के रूप में देखते हैं। उन्होंने एक फिल्म भी बनाई है जिसमें गोमती उद्गम के बारे में विस्तार से दिखाया गया है। यह नदी 960 किलोमीटर तक फैली है। उन्होंने गोमती के संरक्षण और विकास के लिए निकाली गई पदयात्रा को याद करते हुए लोगों से अपील की कि वे गोमती को बचाने के लिए आगे आएं। गोमती रिवरफ्रंट के हालिया विकास से लेकर लखनऊ के पुराने हिस्से तक के पसंदीदा गोमती स्थलों को भी साझा किया।
क्राइम का पाताल लोक सत्र में वरिष्ठ पत्रकार व लेखक मनोज राजन त्रिपाठी ने जीनत सिद्दीकी के साथ बातचीत की, जिसमें उन्होंने माफिया डॉन अतीक अहमद के अपराध से जुड़े कुख्यात किस्सों से लेकर उसकी मौत तक के सफर के बारे में बताया। मनोज राजन ने अपराध और राजनीति के गठजोड़ पर कहा कि अगर माफिया एक पत्नी है, तो राजनीति उसका शौहर है। उन्होंने इस दौरान अपनी किताबों, कहानियों और फिल्मों पर भी बात की।
अलग-अलग सत्रों में रोमांस से लेकर राजनीति तक पर चर्चा हुई। नोबल पुरस्कार 2024 के लिए नामांकित किए गए डॉ. बीएन सान्याल ने एक सत्र में कहा कि काव्य सभी विधाओं में सर्वोच्च विधा है। इसके लिए हास्य त्रासदी और गतिशील कविता और संगीत की आवश्यकता होती है। एक सत्र में लेखक मिलान वोहरा ने बताया कि उन्होंने अपने साहित्यिक सफर की शुरुआत रोमांस से की। कहा, दिल टूटना बेहद निजी अनुभव होता है। यह दो लोगों को एक ही तरह से ठीक नहीं करता। पॉलिटिक्स का घमासान सत्र में भाजपा से गुरु प्रसाद, सपा से अनुराग भदौरिया, कांग्रेस से डॉली शर्मा के साथ वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी ने चर्चा की जिसमें एसआईआर के मुद्दे पर तीखी बहस भी हुई।
इन पुस्तकों का भी हुआ विमोचन : अहसान वजीर की किताब तुम एक कविता थीं का विमोचन किया गया और इस पर लेखक से माइशा अख्तर ने चर्चा की। कनाडा की नोबल पुरस्कार विजेता एलिस मुनरो की कहानियों का अनुवाद आनंद ने कर इसे नाम दिया है मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूं। इसका भी विमोचन किया गया। मृगतृष्णा किताब के विमोचन के साथ ही मृदुला सिंह की काव्ययात्रा पर चर्चा हुई। द इसेंशियल गालिब नामक किताब पर इसके लेखक अनीसुर रहमान के साथ अमिताभ सिंह बघेल ने वार्ता की।
मेटाफर लिटफेस्ट के दूसरे व अंतिम दिन किस्से, कहानियों और कविताओं के बीच संस्कृति, साहित्य, सिने
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