इम्यूनोथेरेपी से टीबी को ठीक किया जाएगा। इसके लिए एक वैक्सीन पर अनुसंधान लगभग पूरा हो गया है। इस वैक्सीन को नाम दिया गया है एम-वाका।
इसका ट्रायल फेज-3 में है। माना जा रहा है कि जल्दी ही ये वैक्सीन बाजार में उपलब्ध होगी। केजीएमयू के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रो. राकेश कुमार दीक्षित ने कलाम सेंटर में आयोजित नेटकॉन-2016 (नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ ट्यूबरकुलोसिस एंड चेस्ट डिजीज) वर्कशॉप में यह जानकारी दी।
प्रो. राकेश कुमार ने बताया कि 1921 में बीसीजी के टीके खोज हुई थी लेकिन शोध में पता चला है कि ये टीका सिर्फ बचपन में ही टीबी से बचाने में सक्षम है।
यही नहीं फेफड़े की टीबी को रोकने में भी ये सक्षम नहीं है। सिर्फ इसी को ध्यान में रखते हुए नई वैक्सीन पर अनुसंधान चल रहा है। जो बच्चों ही नहीं बड़ों को भी टीबी से बचा सके।
उन्होंने बताया कि इस समय तीन कैटेगिरी में टीबी की लगभग 15 वैक्सीन पर शोध कार्य जारी है। इसमें बीसीजी की जगह नई वैक्सीन, बीसीजी के साथ ऐसी वैक्सीन जिसका लंबे समय तक असर रहे और टीबी के मरीजों के लिए इम्यूनोथेरेपी वैक्सीन है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ट्यूबरक्लोसिस एंड रिस्परेटरी डिजीज (एनआईपीआरडी) के चेयरमैन डॉ. रोहित सरीन ने बताया कि एमडीआर (मल्टी ड्रग रजिस्टेंस) और एक्सडीआर (एक्सटेंसिवली ड्रग रजिस्टेंस) टीबी के लिए पीए-824 नाम की एक दवा पर रिसर्च हो रहा है।