यूपी के चर्चित आईपीएस अमिताभ ठाकुर एक बार फिर से चर्चाओं में हैं। निलंबित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के मामले में केंद्रीय न्यायिक अधिकरण (कैट) ने केंद्र व उप्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में विस्तृत प्रतिशपथ पत्र (काउंटर एफीडेविट) दायर करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही जांच अधिकारी वीके गुप्ता को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने को कहा है। अगली सुनवाई दो सितंबर को होगी। उल्लेखनीय है, खुद के खिलाफ डीजी पुलिस भर्ती बोर्ड वीके गुप्ता को जांच अधिकारी नामित करने पर अमिताभ ने कैट में चुनौती दी है।
न्यायिक सदस्य नवनीत कुमार की बेंच ने ठाकुर और राज्य सरकार के अधिवक्ता की बहस सुनने के बाद सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था जो गुरुवार को पारित किया गया। प्रदेश सरकार ने अमिताभ ठाकुर को 13 जुलाई को निलंबित किया और अगले दिन जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया।
ठाकुर ने इसे चुनौती देते हुए कहा था कि अखिल भारतीय सेवा अनुशासन एवं अपील नियमावली के नियम 8(6) के अनुसार किसी आईपीएस अफसर के खिलाफ जांच अधिकारी तभी नियुक्त किया जा सकता है जब उसके द्वारा नियम 8(5) में आरोपों का जवाब दे दिया गया हो।
उनका तर्क था कि उन्हें 13 जुलाई को आरोप पत्र जारी किया गया जो उन्होंने 15 जुलाई को प्राप्त किया। लेकिन 16 जुलाई को जवाब देने से पहले ही प्रदेश सरकार ने जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया। यह नियम के विरुद्ध है।