अगले साल बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लग सकता है।
इसी साल जून में हुई बढ़ोतरी के बाद अब पावर कॉर्पोरेशन अधिकारी 2014-15 के वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) व टैरिफ प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
बढ़ोतरी आठ से दस फीसदी होने की संभावना है। हालांकि इस बढ़ोतरी का असर ग्रामीण और किसानों को मिल रही बिजली पर नहीं होगा।
कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को पत्र भेजकर जल्द से जल्द जरूरी आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है ताकि निर्धारित समय सीमा 30 नवंबर तक राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष प्रस्ताव दाखिल किया जा सके।
आयोग के कड़े रुख को देखते हुए भी कॉर्पोरेशन इस बार समय पर प्रस्ताव दाखिल करने की कोशिश में जी-जान से जुटा है।
समय से प्रस्ताव दाखिल न किए जाने पर विद्युत अधिनियम की धारा 142 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
चुनावी वर्ष में टैरिफ प्रस्ताव तैयार कराने में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
एआरआर का आकार लगभग तय कर लिया गया है जबकि बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर अभी मंथन चल रहा है। सूत्रों के अनुसार अगले साल के लिए लगभग 45000 करोड़ रुपये का एआरआर तैयार कराया गया है।
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एआरआर व टैरिफ को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की मुख्य सचिव जावेद उस्मानी के साथ एक दौर की बैठक भी हो चुकी है।
बिजली कंपनियों की ओर से ऑडिटेड आंकड़े व अन्य वांछित सूचनाएं न भेजे जाने की वजह से इसे अभी अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
सूत्रों का कहना है कि आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए शासन स्तर से ग्रामीण घरेलू व कृषि की दरों को यथावत रखते हुए अन्य श्रेणियों में आठ से 10 फीसदी की वृद्धि का प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।
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अंतिम निर्णय बिजली कंपनियों के आंकड़े मिल जाने के बाद किया जाएगा। चुनाव से पहले बिजली दरों को लेकर बखेड़ा न खड़ा हो, इसलिए तय किया गया है कि एआरआर तो समय पर दाखिल कर दिया जाएगा, लेकिन आयोग को टैरिफ प्रस्ताव बाद में सौंपा जाएगा।
पावर कॉर्पोरेशन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एआरआर की तैयारी अंतिम दौर में होने की बात स्वीकार करते हुए बताया कि बहुत विलंब हुआ तो दिसंबर के पहले सप्ताह तक प्रस्ताव दाखिल कर दिया जाएगा।
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