ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान लेने वालों के लिए अच्छी खबर है। इन मकानों को लेने के लिए आय सीमा बढ़ा दी गई है।
ईडब्ल्यूएस के लिए आय सीमा 60 हजार से बढ़ाकर 1 लाख और एलआईजी की 1.20 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।
छोटे मकानों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निजी विकासकर्ताओं को अपार्टमेंट में अतिरिक्त मंजिल बनाने की अनुमति दी जाएगी। आवंटन में धोखाधड़ी रोकने के लिए पांच साल तक इन्हें बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
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इसके अलावा ईडब्ल्यूएस की कीमत 2 लाख से बढ़ाकर 3.25 लाख और एलआईजी की 4.25 से 7 लाख रुपये कर दी गई है। बृहस्पतिवार को कैबिनेट की बैठक में नई नीति को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने पत्रकारों को दी।
प्रदेश में बढ़ती आबादी के साथ छोटे मकानों की मांग भी काफी तेजी से बढ़ी है। ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकानों के आवंटन की पात्रता वर्षों पहले तय की गई थी। इसमें सबसे बड़ी समस्या आय सीमा की थी।
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इसे देखते हुए आय सीमा बढ़ाने के साथ मकान निर्माण का क्षेत्रफल भी तय कर दिया गया है। पहले विकास प्राधिकरण और निजी विकासकर्ता मनमाने तरीके से इन मकानों का निर्माण कर देते थे।
अब विकास प्राधिकरण ईडब्ल्यूएस मकान 30 से 35 वर्ग मीटर व एलआईजी 40 से 45 वर्ग मीटर में बनाएंगे। ग्रुप हाउसिंग में ईडब्ल्यूएस 25 से 35 वर्ग मीटर व एलआईजी मकान 36 से 48 वर्ग मीटर में बनेंगे।
निजी क्षेत्र में विकसित होने वाली चार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली योजनाओं में 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस व इतने ही एलआईजी मकान बनाने होंगे।
चार हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाली योजनाओं में यह सुविधा दी गई है कि वे 10 लाख व इससे अधिक आबादी वाले शहरों में पांच किलोमीटर के दायरे में व इससे कम जनसंख्या वाले नगरों में दो किलोमीटर के दायरे में ये मकान बना सकेंगे। चार हेक्टेयर क्षेत्रफल से कम योजना वाले विकासकर्ता शेल्टर फीस देकर इन मकानों के निर्माण से बच सकते हैं।
...तो निजी विकासकर्ताओं की बैंक गारंटी होगी जब्त
नई नीति के मुताबिक ईडब्ल्यूएस और एलआईजी घर (एकल) बनाने के स्थान पर अपार्टमेंट में मकान बनाने की सुविधा होगी। निजी विकासकर्ताओं को इन मकानों को बनाने के लिए बैंक की गारंटी या उतनी जमीन बंधक रखनी होगी।
मकानों का निर्माण न करने पर इसे जब्त कर लिया जाएगा। इस नीति के अनुसार इन मकानों को बनाने के लिए अन्य आवासीय स्टॉक की भौतिक प्रगति के अनुपात में लागू किया जाएगा।
उदाहरण के लिए यदि 100 मकान बनाए जाने हैं तो बड़े मकानों के साथ-साथ ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के 20 मकान बनाने होंगे। इन मकानों का आवंटन विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष या आवास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी।