जिला सहकारी बैंकों के कर्मचारियों को दीपावली से पहले पुनरीक्षित वेतनमान एवं भत्तों का तोहफा मिल गया है।
यह एक अप्रैल 2011 से लागू होगा। पुनरीक्षित वेतनमान से सभी संवर्ग लाभान्वित होंगे।
आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता देबाशीष पंडा ने बताया कि बैंककर्मियों के वेतन एवं भत्तों को पुनरीक्षित करने के लिए 18 अप्रैल को कमेटी गठित की गई थी।
इसकी संस्तुति के आधार पर पुनरीक्षित वेतनमान एवं भत्ते देने का निर्णय लिया गया है।
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पुनरीक्षित वेतनमान के लिए शर्त होगी कि इन्हें बैंक की प्रबंध समिति के प्रस्ताव के बाद लागू किया जाएगा।
पुनरीक्षित वेतनमान एवं भत्ते वही बैंक दे सकेंगे जो लाइसेंस प्राप्त हैं और बीआर एक्ट 1949 की धारा 11(1) से बाहर हैं।
पुनरीक्षित वेतनमान में एक अप्रैल 2011 से 31 मार्च 2013 तक का एरियर देय नहीं होगा। वेतनमान निर्धारण स्टेज टू स्टेज होगा और वार्षिक वेतन वृद्धि की तिथि यथावत रहेगी।
पुनरीक्षित वेतनमान और अन्य सुविधाएं कास्ट टू कंपनी के आधार पर मिलेंगी।
यानी केवल वहीं बैक पुनरीक्षित वेतनमान दे सकेंगे जिनकी आर्थिक क्षमता, उपलब्ध संसाधन, बैंकों का प्रशासनिक एवं विधिक व्यय कार्यशील पूंजी का दो प्रतिशत या सकल आय का 40-60 प्रतिशत के बीच हो।
कर्मचारियों पर होने वाले व्यय भार के मद्देनजर अनियमित भत्तों, नियुक्तियों, यात्रा आदि पर प्रतिबंध को लेकर नाबार्ड के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
बैंक कर्मचारियों को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 1960-100 की सीरीज में 0.15 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता देय होगा।
मकान किराया भत्ता मूल वेतन का 15 प्रतिशत लेकिन अधिकतम तीन हजार प्रतिमाह दिया जाएगा। वर्तमान में दिए जाने वाले चिकित्सा भत्ते में 25 फीसदी की वृद्धि कर भुगतान किया जाएगा।
उच्चतर शिक्षा के लिए विशेष प्रोत्साहन भत्ता, स्टेगनेशन इंक्रीमेंट एवं समयमान वेतनमान में वर्तमान व्यवस्था ही लागू रहेगी।
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