पिता की मौत के बाद मां जिंदा है तो बेटे अपने नाम पर पिता की संपत्ति का नामांतरण नहीं करा सकेंगे। एलडीए सचिव मंगला प्रसाद सिंह ने अनापत्ति को आधार बनाकर ऐसा करने की प्रक्रिया बंद करा दी है।
वहीं, एलडीए के योजना सहायकों को भी आदेश दिया गया है कि इस तरह के आवेदनों पर कार्रवाई नहीं की जाए। सचिव का कहना है कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें मां के जिंदा होने पर भी बच्चों ने आवेदन किया कि पिता के नाम पूर्व में रही संपत्ति का नामांतरण उनके पक्ष में किया जाए।
तर्क दिया जाता है कि मां को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं है। मां की लिखित अनापत्ति भी बच्चे प्रक्रिया पूरी करने को देते हैं। अब सहयोगी अधिकारियों की सहमति के बाद तय किया गया है कि इस गलत परंपरा को बंद कराया जाए।
मां को घर से निकालने के कई मामले आ चुके सामने
एलडीए में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिनमें मां के स्वस्थ और संपत्ति की देखभाल में सक्षम होने के बाद भी बच्चे सीधे अपने नाम पर नामांतरण करा लेते हैं। मां की भावनाओं का फायदा उठाकर एनओसी ले ली जाती है।
खास मामलों में ही होगा नामांतरण
वहीं, संपत्ति के नामांतरण के बाद हालात बदल जाते हैं। ऐसे में सामाजिक रूप से पीड़ा मां को झेलनी पड़ती है। लखनऊ में मां को घर से निकालने तक के मामले सामने आए हैं।
सचिव का कहना है कि केवल खास मामलों में ही बच्चों के नाम पर नामांतरण हो सकेगा।
इसके लिए परिस्थितियों का आकलन भी एलडीए अधिकारी करेंगे। दोहरे नामांतरण शुल्क का आर्थिक भार वहन करने में अक्षम परिवारों को रियायत दी जा सकती है। मां की सेहत बहुत खराब होने और अधिक आयु हो जाने पर भी आवेदन के परीक्षण बाद फैसला लिया जा सकेगा।
ऑनलाइन आवेदन ही माना जाएगा
म्यूटेशन के लिए एलडीए केवल ऑनलाइन ही आवेदन ले रहा है। janhit.upda.in पर ही इसके लिए आवेदन किया जा सकता है। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद इसे अनिवार्य सेवा में रखा गया है, जिसे ऑनलाइन कर दिया गया है।
अभी तक यह रही प्रक्रिया
एलडीए में अभी तक नामांतरण के लिए एनओसी देने की प्रक्रिया रही है। नजूल अधिकारी संजय पांडेय का कहना है कि एनओसी मिलने के बाद एक पब्लिक नोटिस जारी किया जाता है। इसके एक महीने बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
इससे संपत्ति का स्वामित्व बदल कर आवेदनकर्ता के पास पहुंच जाता है। एलडीए अभी नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई कॉलोनियों के अलावा फ्रीहोल्ड न हुई संपत्तियों के नामांतरण करता है।
एक भाई के पक्ष में नामांतरण भी कठिन
अधिकारियों का कहना है कि मां का नाम हटाने के साथ अब एक ही भाई या बहन के नाम पर भी नामांतरण आसान नहीं होगा। इसके लिए व्यवस्था बनाई जा रही है कि तहसीलदार या नायब तहसीलदार पूरे मामले की छानबीन करें।
इसके बाद उच्च स्तर जैसे संयुक्त सचिव अपने समक्ष सभी भाई-बहन के बयान लें। इसके बाद ही नामांतरण की संस्तुति हो। इस प्रक्रिया के बाद सक्षम स्तर जैसे सचिव या वीसी से नामांतरण के लिए अनुमोदन लिया जाए।
यहां पढ़ें, इन संपत्तियों में लागू होगी व्यवस्था
इन संपत्तियों में लागू होगी व्यवस्था
एलडीए की उन योजनाओं में मां का नाम नामांतरण के समय नहीं हटाने की व्यवस्था लागू होगी, जो अभी तक नगर निगम को हैंडओवर नहीं हुई हैं। गोमतीनगर के विभूतिखंड के अलावा पूरे गोमतीनगर विस्तार, सीजी सिटी, मानसरोवर योजना, शारदानगर योजना, जानकीपुरम विस्तार के अलावा जानकीपुरम में सेक्टर-जे व एच, बसंतकुंज योजना में यह लागू होगी।
इसके अलावा सभी योजनाओं की उन संपत्तियों का भी नामांतरण एलडीए इस आदेश के अनुपालन में नहीं करेगा, जहां फ्रीहोल्ड नहीं किया गया। इनमें ट्रस्ट, रेंट या लीज होल्ड जैसी संपत्तियां हैं।