सरकार ने शिक्षामित्रों को समायोजित करने का फॉर्मूला खोज लिया है। टीईटी
का झंझट खत्म करते हुए इन्हें शिक्षा सहायक बनाया जाएगा।
इनकी जिम्मेदारी
सर्व शिक्षा अभियान के तहत चलने वाली योजनाओं को देखना होगा। मसलन बच्चों
को कैसा खाना मिल रहा है, यूनिफॉर्म मिला या नहीं, समय से किताबें मिल रही
हैं या नहीं।
इसके अलावा स्कूलों में शिक्षक जो लिखा-पढ़ी के काम करते हैं
वे सब इन्हें करना होगा।
विभाग चाहता है कि इन्हें सहायक अध्यापक के समान
9300 से 34800 वेतनमान और ग्रेड पे 4200 दे दिया जाए, पर अंतिम निर्णय पद
सृजन और वित्त विभाग की मंजूरी पर निर्भर होगा। नियमावली बनाने के लिए
शुक्रवार को इस प्रारूप पर मंथन हुआ।
प्रदेश
के प्राथमिक स्कूलों में 1.70 लाख शिक्षा मित्र हैं। इनके लिए अब नया
वेतनमान और पदनाम बनाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972
के नियम 19 में दी गई व्यवस्था के तहत निदेशालय को यह अधिकार है कि वह अलग
से पद सृजित कर सकता है।
इसके आधार पर ही नया पद सृजित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री से पद और वेतनमान पर अनुमति मिलने के बाद कार्मिक विभाग से
पदों का सृजन कराया जाएगा। इसके बाद शिक्षा मित्रों के समायोजन की
प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
टीईटी का नहीं फंसेगा पेंचशिक्षा
मित्रों को यदि शिक्षक पद पर समायोजित किया जाता तो टीईटी का पेंच फंसता।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद राज्य सरकार ने नियमावली बना दी
है कि शिक्षक बनाने के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य होगा। हाईकोर्ट का भी
यही आदेश है। इसलिए सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है।