मेट्रो रेल परियोजना की राह के रोड़े कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के अधिकारी जहां छह अगस्त को दिल्ली में होने वाली पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की मीटिंग में प्रस्ताव पास कराने के कोशिश में लगे हैं वहीं उनके सामने दो नई मुसीबतें भी आ गई हैं।
पहली, रेलवे ने मवइया क्रॉसिंग के ऊपर स्पेशल स्पैन (विशेष पुल) बनाने के लिए एनओसी में कठिन शर्त जोड़ दी है। इस रेलवे छत्ते से काफी ऊपर क्रॉसिंग के बीच की जगह एक किनारे से अब मेट्रो ट्रैकगुजारा जाएगा। इस शर्त को एलएमआरसी ने मान लिया है।
ऐसे में 105 मीटर लंबे पुल का एलाइनमेंट ही चेंज हो जाएगा। इससे संचालन के दौरान मेट्रो रेल की गति में भी कुछ अंतर आ जाएगा। इसके अलावा निजी जमीन जो एलएमआरसी को चाहिये है, उसमें दो कोर्ट केस आड़े आ गए हैं। अब इनके सुलझने से पहले ये भूमि एलएमआरसी नहीं ले सकेगा। इनमें एक मामला सिंगार नगर और एक आसाराम आश्रम की भूमि का है।
फीडर सर्विसेज के लिए प्री बिड गुरुवार से
मेट्रो स्टेशनों से यात्रियों को उनके मूल गंतव्यों तक पहुंचाने के लिए फीडर सर्विसेज का संचालन किया जाएगा। इसमें बस, ऑटो रिक्शा और ट्राम सुविधाएं होंगी। मगर इनका संचालन किस तरह से किया जाए।
साथ ही पूरे कॉरिडोर में किस तरह से विकास किए जाएंगे, इसको लेकर कंसलटेंट का चुनाव किया जाएगा। इसके लिए एलएमआरसी में बृहस्पतिवार को प्री बिड कॉन्फ्रेंस होगी। छह कंपनियां इसमें भाग लेंगी। प्री बिड के दौरान वे अपनी-अपनी जिज्ञासाएं सामने रखेंगी, जिनका समाधान किया जाएगा।
इसके बाद टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड के तीन महीने के भीतर फीडर सर्विसेज का कंसलटेंट चुन लिया जाएगा।