प्रदेश में नए लोकायुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया लोकसभा चुनाव के बाद शुरू होने की संभावना है। फिलहाल नए लोकायुक्त की नियुक्ति होने तक जस्टिस एनके मेहरोत्रा इस पद पर बने रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जस्टिस मेहरोत्रा का कार्यकाल बढ़ाने सबंधी राज्य सरकार के फैसले को वैध ठहराते हुए छह माह में नए लोकायुक्त के चयन की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
लोकसभा चुनाव के चलते फिलहाल मई तक चयन प्रक्रिया शुरू होने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं। चुनाव खत्म होने के बाद ही सरकार इस बारे में आगे कदम बढ़ाएगी।
मुख्यमंत्री करेंगे चुनाव
प्रदेश में लोकायुक्त का चयन मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष की कमेटी करती है। इन दोनों की आम सहमति से नाम तय होने के बाद सरकार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव तैयार करती है।
सूत्रों का कहना है कि लोकायुक्त की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका केवल परामर्श तक ही सीमित है। उनकी राय मानना सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी की ओर से तय किए गए नाम पर मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके सरकार नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव तैयार करके फाइल राज्यपाल को भेजती है।
इसके बाद राज्यपाल लोकायुक्त की नियुक्ति का आदेश जारी करते हैं। चूंकि मुख्यमंत्री अभी चुनाव में व्यस्त हैं, ऐसे में नियुक्ति की प्रक्रिया 16 मई के बाद ही शुरू होगी।
नियुक्ति की समय सीमा नहीं
सूत्रों का कहना है कि बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में छह माह के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है।
नियुक्ति के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है। फिलहाल न्यायमूर्ति मेहरोत्रा का कार्यकाल बढ़ाने के संबंध में राज्य सरकार ने उ.प्र. लोकायुक्त अधिनियम में जो संशोधन किया है।
संशोधन के अनुसार नए लोकायुक्त की नियुक्ति होने तक वे पद पर बने रह सकते हैं।