डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज फेफड़े के कैंसर की जीन का पता लगाने के लिए फ्लोरेसेंस इन सिटू हाइब्रिडाइजेशन (फिश) टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराएगा।
अभी तक प्रदेश में यह सुविधा किसी भी चिकित्सा संस्थान में नहीं है। इस टेस्ट से खराब जीन का पता चल जाता है। इसके बाद उसे विशेष दवा देकर खत्म कर दिया जाता है।
लोहिया इंस्टीट्यूट की निदेशक प्रो. नुजहत हुसैन और पैथोलॉजी विभाग के हेड डॉ. प्रद्युम्न सिंह ने यह जानकारी शुक्रवार को प्रेस कान्फ्रेंस में दी।
प्रो. नुजहत हुसैन ने बताया कि फिश टेस्ट से जीन की अनुवांशिक गड़बड़ी का पता लगाया जा सकता है। इससे कैंसर के मरीज की खराब जीन का पता लग जाएगा और फिर उसे ‘टारगेट थेरेपी’ से खत्म किया जा सकेगा।
फेफड़े और स्तन कैंसर के कारक खराब जीन को इस टेस्ट की मदद से पकड़ा जा सकेगा। डॉ. प्रद्युम्न सिंह ने बताया कि फिश टेस्ट काफी महंगी जांच है, लेकिन लोहिया इंस्टीट्यूट में निजी केंद्रों के मुकाबले एक तिहाई ही शुल्क लिया जाएगा।