नया बिजली कनेक्शन जारी करने या मीटर बदलने में हीलाहवाली अब पावर कार्पोरेशन के अभियंताओं व कर्मचारियों को भारी पड़ सकती है।
घरेलू व औद्योगिक उपभोक्ताओं को आवेदन के एक माह के भीतर नया कनेक्शन जारी करना होगा।
यही नहीं आवेदन पत्र देने की तिथि से 30 दिन के भीतर खराब मीटर भी बदलना होगा। निश्चित समयावधि में आवेदन पत्र का निस्तारण न होने पर संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
प्रमुख सचिव लोक सेवा प्रबंधन प्रभात कुमार सारंगी ने बताया कि राज्य सरकार ने कुल 123 सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम 2011 के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसमें बिजली की चार सेवाएं शामिल हैं।
नया कनेक्शन जारी करने, खराब मीटर व ट्रांसफार्मर बदलने तथा विद्युत दुर्घटना संबंधी सहायता मिलने में होने वाली देरी को देखते हुए इन सेवाओं को जनहित गारंटी अधिनियम में शामिल करने का निर्णय किया गया है।
कनेक्शन जारी करने, खराब मीटर बदलने तथा विद्युत दुर्घटना संबंधी भुगतान के लिए 30 दिन की समयसीमा रखी गई है जबकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए सात दिन की समयसीमा तय की गई है।
सारंगी ने बताया कि अगर निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन पत्रों का निस्तारण नहीं किया जाता है तो कनेक्शन जारी करने, खराब मीटर बदलने तथा विद्युत दुर्घटना भुगतान संबंधी मामलों में नामित अधिकारी द्वारा प्रथम अपील तथा द्वितीय अपील का निस्तारण 15 दिन के अंदर करना होगा।
औद्योगिक विद्युत कनेक्शन के मामले में प्रथम अपील तथा द्वितीय अपील का निस्तारण 30 दिन के अंदर करना होगा। इसके अलावा जले ट्रांसफॉर्मर बदले जाने के संबंध में प्रथम एवं द्वितीय अपील का निस्तारण सात दिन में करना होगा। सारंगी ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
प्रदेश में सिटीजन चार्टर के रूप में लागू जनहित गारंटी अधिनियम में तय समय में सेवाएं न देने वाले अफसरों पर से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया गया है।
अभी तक सेवाओं में देरी होने पर अफसर बच जाते थे। जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में लाई गई सेवाओं से संबंधित विभागों में रजिस्टर रखे जाएंगे जिसमें आवेदक द्वारा मांगी गई सेवा, उस पर अमल तथा सेवा समय से न मिलने की कारण दर्ज क रना होगा।
यह रजिस्टर कोई भी व्यक्ति देख सकता है। इन रजिस्टरों में दर्ज होगा कि किस तारीख को कौन सा आवेदन आया और तय समय में कार्रवाई हुई या नहीं।