लखनऊ। नई शिक्षा नीति 2020 में कम से कम दस फीसदी कॉलेजों को स्वायत्त बनाने की गाइडलाइन है। वहीं लखनऊ विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र में कहानी इससे ठीक अलग है। हालत यह है कि 550 कॉलेज में से सिर्फ एक कॉलेज ही स्वायत्त है। यह हालत तब है जबकि विवि के कई कॉलेजों में छात्र संख्या दस हजार के करीब है।
लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध सिर्फ नेशनल पीजी कॉलेज ऐसा महाविद्यालय है जो स्वायत्त है। शहर में करीब 20 एडेड, चार राजकीय और एक नगर निगम डिग्री कॉलेज है। इसके अलावा सौ से अधिक स्ववित्तपोषित कॉलेज हैं। नई शिक्षा नीति लागू होने के तीन वर्षों के बाद अब इनमें से किसी भी महाविद्यालय को ऑटोनाॅमस कॉलेज बनाने के रास्ते पर काम नहीं हो सका है।
किसी भी कॉलेज के स्वायत्त होने का मतलब होता है कि सिलेबस बनाने और परीक्षा कराने की आजादी। इसका मतलब है कि स्वायत्त कॉलेज यह खुद तय करते हैं कि उनको क्या पढ़ाना है। कॉलेजों या छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर जल्दी-जल्दी कोर्स अपडेट नहीं हो पाता है। वहीं स्वायत्त कॉलेज यह काम आसानी से कर पाते हैं। स्वायत्त कॉलेज का दूसरा बड़ा फायदा है कि खुद अपनी परीक्षा कराना। ऐसा होने पर वे जल्द अपना रिजल्ट निकाल लेते हैं। नेशनल पीजी काॅलेज में तो परीक्षा के ही दिन परिणाम घोषित होने का भी रिकॉर्ड है। अगर शहर में या संबद्ध जिलों में स्वायत्त कॉलेजों की संख्या बढ़ती है तो निश्चित ही नई शिक्षा नीति के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो पाएगा।
परीक्षा परिणाम में निकल जाता है समय
सहयुक्त कॉलेज लखनऊ विश्वविद्यालय के सहारे रहते हैं। ऐसे में वे अपने स्तर से परीक्षा का आयोजन नहीं कर सकते हैं। इससे उन्हें भी विवि के अनुरूप ही सभी शैक्षणिक प्रक्रियाओं में भाग लेना होता है। जब से सेमेस्टर प्रणाली लागू हुई है, तब से शैक्षणिक कैलेंडर के अनुरूप भी परीक्षाएं नहीं हो पाती हैं। इनमें हर साल विलंब हो ही जाता है।
केकेसी को डीम्ड विवि बनाने की हो चुकी चर्चा
लविवि से सहयुक्त श्री जय नारायण मिश्र केकेसी पीजी कॉलेज ऐसा महाविद्यालय है जिसमें सबसे अधिक छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। स्वयं कुलपति भी इसके डीम्ड विवि बनने की चर्चा कर चुके हैं। अगर ऐसा हो जाता है तो यह महाविद्यालय अपने आप स्वायत्त की भूमिका निभाएगा। इससे वे शैक्षणिक तौर पर अधिक सक्षम हो सकेंगे।