लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पंचकर्म केंद्र की स्थापना पर लापरवाही की मार लगी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए 30 जुलाई को केजीएमयू प्रशासन को इसका निर्देश दिया था। ढाई महीने से ज्यादा समय बीतने के बावजूद केजीएमयू प्रशासन इस मामले में अब भी प्रस्ताव तक नहीं भेज पाया है।
मुख्यमंत्री ने 30 जुलाई को चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में मरीजों को एक ही छत के नीचे एलोपैथिक और आयुष पद्धति से इलाज मुहैया कराने के लिए पंचकर्म का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का निर्देश दिया था। केजीएमयू के कुलसचिव ने इस बैठक में भाग लिया था। उस समय एक महीने में इसका प्रस्ताव उपलब्ध कराने की सहमति दी गई थी, लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से रिमाइंडर भेजा गया है।
वर्ष 2005 से शुरू हुई थी कवायद
केजीएमयू में सबसे पहले वर्ष 2005 में पंचकर्म सेंटर स्थापित करने की योजना तैयार हुई थी। उस समय करीब 45 करोड़ से दो एकड़ जमीन पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर स्टेट ऑफ आर्ट मॉडल आयुर्वेद पंचकर्म वेलनेस यूनिट और रिसर्च सेंटर बनाने का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था। इसके बाद वर्ष 2010 में दीक्षांत समारोह में तत्कालीन कुलपति डॉ. सरोज चूड़ामणि गोपाल ने सेंटर बनाने की घोषणा की। वर्ष 2012 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने केजीएमयू में कार्यक्रम के दौरान आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए पंचकर्म सेंटर स्थापित करने की बात कही थी। इसके बाद एक बार फिर से मुख्यमंत्री ने इसे आगे बढ़ाने के लिए कहा है।
Iएलोपैथी के साथ ही आयुर्वेद को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार इस पर काम किया जा रहा है। जल्द ही केंद्र स्थापित करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा। I
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- प्रो. केके सिंह, प्रवक्ता केजीएमयूI