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Lucknow News: डिजिटल मीडिया के सकारात्मक इस्तेमाल की जरूरत

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सफा इंस्टीट्यूट की वर्कशॉप में विद्यार्थियों को मोबाइल जर्नलिज्म, फैक्ट चेकिंग और सोशल मीडिया की दी ट्रेनिंग
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। मीडिया की अहमियत से ज्यादा जरूरी इसके प्रति जागरूकता है। आज मीडिया कई रूपों में मौजूद है और जरूरत इसकी नकारात्मक भूमिका से बचते हुए सकारात्मक इस्तेमाल करने की है। मीडिया की नैतिक और कानूनी सीमाओं को समझना भी जरूरी है। ये विचार सोमवार को सफा इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया लिटरेसी एंड जर्नलिज्म की ओर से दारुल कुरान शाहीन, पैहिया काकोरी में आयोजित एक दिवसीय डिजिटल मीडिया वर्कशॉप में वक्ताओं ने व्यक्त किए।
पूर्व कार्यवाहक कुलपति एवं लॉ फैकल्टी के डीन प्रोफेसर मसूद आलम फलाही की अध्यक्षता में हुई वर्कशॉप में करीब चार दर्जन विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मुहम्मद नसीब ने सूरह नबा की ट्रेनिंग दी, जबकि इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के डॉ. मुहम्मद जुबैर ने सोशल मीडिया के जरिए सूचना प्रसार, पहचान बनाने और आय के अवसरों की जानकारी दी। डॉ. मुहम्मद अशफाक ने मीडिया की स्वतंत्रता के साथ उसकी जिम्मेदारियों और सीमाओं पर चर्चा की। सलीम आजाद ने मोबाइल जर्नलिज्म के तहत वीडियोग्राफी, एडिटिंग, कैप्शन, थंबनेल, टाइटल, टैग और अपलोडिंग का प्रशिक्षण दिया।
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करियर काउंसलर अजरा जिलानी ने सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल पर प्रैक्टिकल एक्सरसाइज कराईं। मुफ्ती मुनव्वर सुल्तान और मौलाना इस्तिफा उल हसन नदवी ने खबरों की सत्यता जांचने और पुष्टि के बाद ही साझा करने पर जोर दिया। मौलाना जहांगीर आलम कासमी ने इंसानी मूल्यों के संरक्षण के लिए मीडिया के सकारात्मक इस्तेमाल की बात कही। डॉ. मूनिस ने कम्युनिकेशन स्किल्स की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन सफा इंस्टीट्यूट के प्रोग्राम डायरेक्टर मुहम्मद गुफरान नसीम ने किया। अंत में विद्यार्थियों ने अनुभव साझा किए और मौलाना मुस्तफा नदवी मदनी की दुआ के साथ वर्कशॉप का समापन हुआ।
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