देश की सियासत को अगर बाहरी दखल से बचाना है तो पहले चुनावी प्रक्रिया में
बदलाव जरूरी है।
रविवार को सिटीजन फोरम की ‘राजनीति में धर्मगुरुओं का
बढ़ता वर्चस्व और लोकतंत्र’ विषय पर प्रेसक्लब में आयोजित संगोष्ठी में यह
बात सूबे की सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. अम्मार रिजवी ने कही।
उन्होंने कहा
कि सबसे पहले सांप्रदायिक प्रकृति वाली राजनीतिक पार्टियों को ही
प्रतिबंधित कर देना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सीपीआई नेता अतुल
कुमार अंजान ने कहा कि सियासत में धर्मगुरुओं के आने के बाद से उनकी छवि
धूमिल हो रही है।
वहीं, एलयू के प्रो. रमेश दीक्षित का कहना था कि धर्मगुरु
मजाक का पात्र बन रहे हैं, इससे आवाम को भी फर्क नहीं पड़ता। अल्पसंख्यक
आयोग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ग्यासुद्दीन किदवई ने भी विचार रखे।