प्रशिक्षण में दार्शनिक जॉन रॉल्स द्वारा बताई गयी “अज्ञानता का पर्दा” जैसी अवधारणाओं के बारे में भी ज़िक्र हुआ, जो व्यक्ति द्वारा कोई निर्णय लेने के दौरान उसके द्वारा निष्पक्षता और भावनात्मक अलगाव जैसे गुणों को प्रदर्शित करने की वकालत करती हैं।
न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (जेटीआरआई), लखनऊ में सिविल जजों (जूनियर डिवीजन) के लिए चल रहे रेफ़्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 'निष्पक्ष निर्णय लेने और विवादों के बेहतर प्रबंधन करने’ के विषय पर एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया जिसमे 60 सिविल जजों ने प्रतिभाग किया। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य जजों को मैनजमेंट से संबंधित कान्सेप्ट्स और सिद्वांतों से रूबरू कराना था।
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इस प्रशिक्षण सत्र को आईआईएम इंदौर के मैनेजर श्री नवीन कृष्ण राय ने सम्बोधित किया। राय ने डिसिज़न विज्ञान, प्रबंधन, नेगोशीएशन सिद्धांत और मनोविज्ञान से सम्बंधित विभिन्न कान्सेप्ट्स के माध्यम से प्रतिभाग कर रहे जजों को ‘विवादों के बेहतर प्रबंधन करने और न्यायसंगत निर्णय लेने’की तरकीबों के बारे में बताया।
उन्होंने स्कीमा सिद्धांत के बारे में विस्तार से बात करते हुए बताया कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग अनुभव ही उनके दृष्टिकोण को अन्य व्यक्तियों से बनाते हैं। इसलिए किसी भी केस में निर्णय देते समय उन्हें आरोपी, पीड़ित व अपने स्वयं के स्कीमा के बारे में एक बार विचार आवशय कर लेना चाहिए जिससे कि यह सुनिस्चित हो सके वह जो भी निर्णय दे रहे हों वह निष्पक्ष है और उसमें नियम-क़ानून के साथ-साथ मानवता के पहलूओं को भी ध्यान रखा गया है।
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प्रशिक्षण में दार्शनिक जॉन रॉल्स द्वारा बताई गयी “अज्ञानता का पर्दा” जैसी अवधारणाओं के बारे में भी ज़िक्र हुआ, जो व्यक्ति द्वारा कोई निर्णय लेने के दौरान उसके द्वारा निष्पक्षता और भावनात्मक अलगाव जैसे गुणों को प्रदर्शित करने की वकालत करती हैं।
राय ने कहा कि निष्पक्ष निर्णय लेने और विवादों का कुशलता पूर्वक समाधान करने का कौशल जजों के लिए न केवल अदालत कक्ष में आवश्यक हैं, बल्कि यह उनके व्यक्तिगत जीवन का भी अभिन्न हिस्सा है। यह कौशल उन्हें व्यक्तिगत और संगठनात्मक विवादों से कुशलतापूर्वक निपटते हुए निष्पक्ष निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं। निष्पक्ष निर्णय लेना किसी भी जज के कौशल की नींव होती है जिससे उसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है, जबकि विवादों का सफल निष्पादन उनके प्रदर्शन को बढ़ाने के साथ-साथ उनकी नेतृत्व क्षमताओं को भी मजबूत करता है।