लखनऊ। कैसरबाग स्थित अमीरुद्दौला लाइब्रेरी अब ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने का केंद्र बनेगी। यहां सुप्रसिद्ध प्रकाशक मुंशी नवल किशोर के नाम से एक विशेष म्यूजियम का निर्माण प्रस्तावित है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इसकी कार्ययोजना तैयार कर ली है। बृहस्पतिवार को मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब ने इसका प्रेजेंटेशन देखा और आवश्यक निर्देश दिए। एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि मुंशी नवल किशोर ने वर्ष 1858 में प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की थी और अपने जीवनकाल में हिंदी, उर्दू, अरबी, बंगाली, मराठी, अंग्रेजी व अन्य भाषाओं में 5000 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया था। उनके योगदान को संरक्षित करने के उद्देश्य से लाइब्रेरी के एक हिस्से को संग्रहालय में परिवर्तित किया जाएगा।
करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस म्यूजियम में विंटेज प्रिंटिंग मशीनें, पुराने रिकॉर्ड्स, पारंपरिक परिधान, मूर्तियां और ध्वनि प्रभाव (साउंड स्केपिंग) जैसे आधुनिक माध्यम शामिल होंगे। म्यूजियम में इंटरैक्टिव डिस्प्ले यूनिट भी लगाई जाएगी, जिससे आगंतुकों को ज्ञानवर्धक अनुभव मिलेगा।
लाइब्रेरी को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा और म्यूजियम को हेरिटेज लुक में डिजाइन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यह लखनऊ की ऐतिहासिक पहचान से और अधिक जुड़ सके। बैठक में सचिव विवेक श्रीवास्तव, मुख्य अभियंता नवनीत शर्मा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
167 साल पहले लखनऊ में स्थापित की थी पहली प्रिंटिंग प्रेस
मुंशी नवल किशोर ने 167 साल पहले 1858 में लखनऊ में उत्तर भारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की थी। 1836 में अलीगढ़ में उनकी पैदाइश हुई थी। उन्होंने लखनऊ में 1859 में अवध अखबार नाम से साप्ताहिक अखबार निकाला। 1895 में उनका लखनऊ में निधन हो गया था। भारत सरकार ने 1970 में मुंशी नवल किशोर के सम्मान में डाक टिकट जारी किया था।