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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस विशेष: हैंडलूम विलेज से बदली गांवों की तस्वीर, महिला बुनकरों की आय में 40% तक बढ़ोतरी

Fri, 07 Aug 2026 04:55 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सामने आए आंकड़ों के अनुसार, हैंडलूम विलेज को ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने की पहल से महिला बुनकरों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से कारीगरों को सीधे बाजार मिला, जबकि महिलाओं की भागीदारी, रोजगार और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली।
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महिला बुनकरों की आय में 40% तक बढ़ोतरी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन अब केवल प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं है, बल्कि पारंपरिक 'हैंडलूम विलेज' को भी पर्यटन का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की एग्री रूरल और गंगा ग्राम रूरल टूरिज्म परियोजनाओं के तहत 'हैंडलूम विलेज' को पर्यटन से जोड़ने की पहल का सकारात्मक असर दिखने लगा है। 

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इस मॉडल से जुड़ी महिला बुनकरों और कारीगरों की औसत आय में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि कुछ प्रमुख हैंडलूम क्लस्टरों में 70 प्रतिशत से अधिक बुनाई का कार्य महिलाएं संभाल रही हैं। पर्यटन विभाग ने औरैया, वाराणसी, बांदा, चित्रकूट, लखीमपुर खीरी और बागपत के पारंपरिक 'हैंडलूम विलेज'को ऐसे पर्यटन अनुभव के रूप में विकसित करना शुरू किया है। 

जहां पर्यटक केवल हस्तनिर्मित उत्पाद खरीदते ही नहीं, बल्कि लाइव हैंडलूम बुनाई देखते हैं, बुनकरों से संवाद करते हैं, गांवों का भ्रमण करते हैं और स्थानीय संस्कृति को करीब से महसूस करते हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होने के साथ बुनकरों को सीधे ग्राहक मिलने लगे हैं।

 

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मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

पर्यटन बढ़ा तो 'हैंडलूम विलेज' तक पहुंचा बाजार

वाराणसी, चित्रकूट, बांदा, औरैया और बागपत जैसे पांच जिलों में, जहां प्रमुख 'हैंडलूम विलेज' स्थित हैं, मई से जुलाई के बीच पर्यटकों की संयुक्त संख्या में लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।  सबसे अधिक वृद्धि औरैया में लगभग 90 प्रतिशत, बांदा में करीब 49 प्रतिशत, वाराणसी में 36 प्रतिशत, चित्रकूट में 30 प्रतिशत और बागपत में 10 प्रतिशत से अधिक रही। अब विभाग की रणनीति इन स्थापित पर्यटन स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को आसपास के हैंडलूम गांवों और बुनकर बस्तियों तक ले जाने की है, ताकि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे ग्रामीण कारीगरों तक पहुंचे।

 

 

महिलाओं के हाथों मजबूत हो रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

'हैंडलूम विलेज' में मिलेगा असली शिल्प अनुभव

योजना के तहत वाराणसी आने वाले पर्यटकों को हिरामपुर के बुनकरों से जोड़ा जा रहा है। चित्रकूट की धार्मिक यात्रा के साथ रासिन गांव का हैंडलूम और हस्तशिल्प अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि बांदा और बुंदेलखंड आने वाले पर्यटक कनवारा, कालिंजर और मिरतला जैसे गांवों में पारंपरिक बुनाई, बुनकरों के जीवन और स्थानीय उत्पादों को करीब से देख सकेंगे। इसी तरह लखीमपुर खीरी के परसिया, गोबरौला और बैंकटी गांवों को दुधवा क्षेत्र के ईको-टूरिज्म और थारू सांस्कृतिक अनुभव से जोड़ने की तैयारी है।

 

 
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'हैंडलूम विलेज' में मिलेगा असली शिल्प अनुभव - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

महिलाएं बनीं बदलाव की सबसे बड़ी ताकत

इस पहल का सबसे बड़ा लाभ महिला स्वयं सहायता समूहों और महिला बुनकरों को मिला है। पहले जहां अधिकांश महिलाएं केवल घरेलू स्तर पर उत्पादन तक सीमित थीं, वहीं अब वे डिजाइन, गुणवत्ता, मूल्य निर्धारण, ग्राहक संवाद और प्रत्यक्ष बिक्री जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, बाजार से जुड़ाव और व्यावसायिक क्षमता निर्माण ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई गति दी है। 

लखीमपुर खीरी की नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित आरती राणा जैसी महिला कारीगर इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरी हैं। उनके प्रयासों से थारू हस्तशिल्प को दुधवा आने वाले पर्यटकों तक पहुंचाने में मदद मिली है। वहीं मास्टर बुनकर छिद्दो देवी जैसी महिलाएं नई पीढ़ी को इस पारंपरिक बुनाई कला से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
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