विधान परिषद के सभापति रमेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी की सदस्यता समाप्त करने वाली बसपा की याचिका खारिज कर दी है। इसे बसपा और पार्टी सुप्रीमो मायावती के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इस फैसले से सिद्दीकी की विधान परिषद की सदस्यता सुरक्षित हो गई है। उनकी सदस्यता 30 जनवरी 2021 तक है।
मायावती ने अपने परम विश्वसनीय और ताकतवर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके पुत्र अफजल को इसी वर्ष 10 मई को बसपा से निकाल दिया था। उन्होंने सिद्दीकी पर दल विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने का आरोप लगाया था। जवाब में नसीमुद्दीन ने मायावती पर पैसों की वसूली का गंभीर आरोप लगाते हुए कुछ वीडियो क्लिपिंग सार्वजनिक की थी।
पिछले दिनों विधान परिषद में बसपा नेता सुनील कुमार चित्तौड़ ने सभापति के समक्ष याचिका दायर करके सिद्दीकी की सदस्यता रद्द करने का आग्रह किया था। याचिका में तर्क दिया गया था कि दलबदल नियमावली 1987 के अनुसार, सिद्दीकी की सदस्यता निरस्त की जानी चाहिए। पर, सभापति ने बुुधवार को यह याचिका खारिज कर दी। सभापति के अनुसार, बसपा की तरफ से दिए गए तर्क तथ्यपूर्ण न पाए जाने पर याचिका को निरस्त कर दिया गया है।
बता दें कि बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने मायावती पर आरोप लगाया था कि मायावती ने उनसे भी टिकट की एवज में पैसे मांगे। चुनाव के बाद भी मायावती ने पैसों की मांग की। इसे देने में असमर्थता जताने पर उन्हें बसपा से निकाल दिया गया। सिद्दीकी ने बसपा से अलग होने के बाद राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा बना लिया