वर्तमान सरकार में मंत्री स्वाति सिंह एवं उनके परिवार की महिलाओं के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने के आरोपी और कोर्ट से भगोड़ा घोषित किए गए बसपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कोर्ट में अर्जी दे कर ज़मानत देने की मांग की है। एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने अर्जी पर सुनवाई के लिए सात नवंबर की तारीख़ तय की है।
बताते चले इस मामले में कोर्ट ने हाईकोर्ट के निर्देश पर संज्ञान के बिंदु पर आरोपियों का पक्ष सुनने के बाद आरोपीयो की अर्जी को खारिज कर दिया था और चूंकि इस मामले में किसी भी आरोपी ने जमानत नहीं कराई थी लिहाजा कोर्ट ने मामले के आरोपी बसपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, राष्ट्रीय सचिव मेवा लाल, गौतम नौशाद अली एवं अतर सिंह राव को जमानत कराने का निर्देश दिया था। लेकिन आरोपीयो ने कोर्ट में हाजिर होकर जमानत नहीं कराई। इस पर कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ वारंट और फरारी की उद्घोषणा का आदेश जारी किया था।
पत्रावली के अनुसार इस घटना की रिपोर्ट मंत्री स्वाति सिंह की सास तेतरा देवी ने 21 जुलाई 2016 को हजरतगंज में दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि 20 जुलाई 2016 को दोपहर राज्यसभा में बसपा सुप्रीमो मायावती ने उनकी बेटी को तथा बहु एवं नातिन के साथ साथ देश की समस्त महिलाओं को पूरे सदन में गालियां दी एवं अपशब्द कहे। इसके बाद 21 जुलाई 2016 को बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के बुलाने पर बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर एवं मेवालाल आदि ने घटनास्थल अंबेडकर प्रतिमा पर बसपा कार्यकर्ताओं ने उनके पुत्र दयाशंकर सिंह को मां बहन की गालियां दी तथा अभद्र टिप्पणी का प्रयोग करते हुए बैनर लेकर प्रदर्शन किया था।
कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान दयाशंकर सिंह को फांसी देने एवं जान से मारने की बात कही गई थी तथा बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के कहने पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने गालियां देते हुए कहा था कि दयाशंकर को फांसी दो एवं आपत्तिजनक जाति शब्दों का प्रयोग किया था। जिससे वादी एवं उसका समस्त परिवार मानसिक रूप से पीड़ित हुआ। पुलिस ने इस मामले में विवेचना के नसीमुद्दीन सिद्दीकी, राम अचल राजभर, मेवा लाल गौतम, नौशाद अली एवं अतर सिंह राव के खिलाफ कोर्ट में पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किया था।