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विहिप की संकल्प सभा से मोदी की कानपुर रैली पर संकट

Thu, 17 Oct 2013 10:03 PM IST
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
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गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की कानपुर रैली में अब बमुश्किल 24 घंटे बचे हैं।
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इसी के साथ भगवा चेहरों की रैली में मौजूदगी से जुड़े सवाल हवा में तैरने लगे हैं। अभी तक कई भगवा चेहरों के इस रैली से दूर रहने के संकेत हैं।

हालांकि संघ इस कोशिश में जुट गया है कि मोदी की पहली रैली में कुछ भी ऐसा न हो जिससे कोई गलत संदेश जाए, लेकिन पार्टी नेतृत्व को इसमें सफलता मिल पाना बहुत मुश्किल दिख रहा है।

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फिलहाल यह तय हो चुका है कि मंच पर मोदी के साथ कल्याण सिंह भी हुंकार भरेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाते राजनाथ सिंह भी मोदी के साथ मुख्य मंच पर रहेंगे।

बदला वक्त या और कुछ
बदले वक्त की बात हो या संयोग अथवा पार्टी के समीकरण या फिर भाजपा में काफी गहरे तक घर कर गई खींचतान।

मोदी की कानपुर रैली नजदीक आने के साथ ही यह सवाल जोर पकड़ने लगा है कि कानपुर से मिशन यूपी की शुरुआत करने जा रहे मोदी का साथ देने के लिए यहां के भगवा चेहरे कितने तैयार हैं?
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भले ही मोदी इस समय भगवा टोली में सबसे ज्यादा डिमांड वाले नेता हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यूपी में मोदी से ज्यादा डिमांड उमा भारती की रहा करती थी।

पर, मोदी जब कानपुर में अपने मिशन यूपी की शुरुआत करने जा रहे हैं तो इस अवसर पर उमा की उनके साथ मौजूदगी की संभावनाएं दूर-दूर तक नहीं दिख रही हैं।

सूत्रों के अनुसार, उनका अभी तक कानपुर आने का कार्यक्रम तय नहीं हुआ है। यह बात दीगर है कि भोपाल की तरह ही उन्हें अचानक कानपुर भेजने का फैसला हो। पूर्वांचल में भाजपा की बात हो तो सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम आना जरूरी है।

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पर, कानपुर रैली में उनकी मौजूदगी अभी तय नहीं है। वरुण गांधी की पूंजी भी उनका भगवा चेहरा ही है। पर, कानपुर रैली में उनकी मौजदूगी को लेकर भी अभी तक तस्वीर साफ नहीं है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी की मानें तो उमा भारती रैली में आ सकती हैं, पर अन्य लोगों के आने के बारे में उनके पास अभी तक कोई सूचना नहीं है।

इस बीच यह भी पता चला है कि अयोध्या आंदोलन से भगवा चेहरा बनकर उभरे विनय कटियार कानपुर रैली में रहेंगे तो लेकिन उनके बोल शायद ही लोगों को सुनने को मिलें।

तीन मेहमान, बाकी मेजबान
भले ही कारण कोई हो लेकिन ये नेता अगर रैली में नहीं दिखते हैं तो इसका संदेश ठीक नहीं जाएगा। भगवा खेमों की दरार यूपी में मोदी के मिशन व उनके तेवरों को कुछ गोठिल कर सकती है।

साथ ही भाजपा के विरोधियों को भी हमला करने का मौका दे सकती है। रैली में किस नेता को बुलाया गया है, किसे नहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बचते हैं।

कहते हैं कि रैली भाजपा की है। सभी प्रमुख लोगों को आना चाहिए। उन्होंने नारा दे दिया है, ‘तीन मेहमान, बाकी मेजबान।’ इन तीन मेहमानों में मोदी के अलावा कल्याण सिंह और राजनाथ सिंह शामिल हैं।

जानकारी के मुताबिक, रैली में मोदी के आने के बाद सिर्फ यही तीन नेता बोलेंगे। इसके अलावा बाकी सभी नेता श्रोता रहेंगे।

शायद यही वजह है कि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी अपने गृह प्रदेश में होने वाली मोदी की पहली रैली से दूरी बना ली है।

कुल मिलाकर साफ हो गया है कि यह रैली भले ही आम लोगों को भाजपा के साथ जोड़ने में कामयाब हो जाए लेकिन भगवा खेमे के कुछ नेताओं की रैली से दूरी उन दरारों को दिखा ही जाएगी, जिनकी वजह से भाजपा आज दुर्दिन झेल रही है।
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रैली को मिला नाम
मोदी की कानपुर रैली को भाजपा ने ‘विजय शंखनाद रैली’ नाम दिया है। प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि कानपुर रैली के साथ ही पार्टी यूपी में भाजपा की विजय का शंखनाद करेगी।

रैली की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रैली को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने और उन्हें दिखाने के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।

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