विजेता का फैसला भले ही 16 मई को हो लेकिन लोगों का रूझान तो यही कहता है कि काशी की जनता ने मोदी को अपना प्रतिनिधि मान लिया है।
वोटिंग के दिन काशी की धरती पर मतदान केंद्रों पर दिख रहे माहौल के अनुसार ही अगर ईवीएम मशीनों के बटन दबे हैं तो यहां के लोगों ने मोदी को अपना प्रतिनिधि मान लिया है।
इसकी अब औपचारिक घोषणा होना ही शेष है। अब जो भी लड़ाई है वह दूसरे नंबर की है। इस लड़ाई में ‘आप’ के अरविंद केजरीवाल ऊपर होंगे या कांग्रेस के अजय राय, यही सामने आना बाकी रह गया है।
शायद यह काशी की ही खासियत है कि हर जगह तो लोगों में नंबर एक को लेकर जिज्ञासाएं रहती हैं, वहीं वाराणसी लोगों को इस सवाल में उलझाए हैं कि दूसरे नंबर पर वह किसे रखेगी।
मोदी रहे केंद्र
काशी के बारे में कहा जाता है कि यहां की सड़कें सूरज के जगने से पहले गुलजार हो जाती हैं। पर, सोमवार को ऐसा नहीं था। सड़कों पर सन्नाटा दिख रहा था।
मतदान शुरू होने से 15 मिनट पहले तक यह आशंका परेशान करने लगी थी कि सबसे बड़ा फैसला करने की जिम्मेदारी लिए काशी, मतदान में क्या पिछले वर्ष से भी पीछे रह जाएगी।
पर, सात बजते ही अचानक सड़कें गुलजार हो गईं और मतदान केंद्रों पर लाइनें लग गईं तो लगा कि सही समय पर सही फैसला करने के कारण ही काशी को खास दर्जा मिला हुआ है। दोपहर बाद मतदान का प्रतिशत बढ़ा।
किसी ने बदलाव तो किसी ने रास्ता रोकने के लिए वोटिंग मतदान शुरू हुआ तो यह साफ होने लगा कि वाराणसी के लोग मोदी को केंद्र बनाकर वोट डाल रहे हैं।
मोदी को पीएम देखना चाहते हैं
कहीं मोदी को जिताने के लिए तो कहीं मोदी का रास्ता रोकने के लिए अरविंद केजरीवाल या अजय राय अथवा अन्य उम्मीदवारों में सपा के कैलाश चौरसिया और बसपा के विजय जायसवाल को।
मोदी को वोट देने वालों के मन में अलग-अलग तरीके के परिवर्तन की आकांक्षाएं हैं। कुछ ऐसी आकांक्षाएं भी हैं, जो मोदी के लिए चुनौती बन सकती है।
पाण्डेयपुर के सुधाकर महिला शिक्षण संस्थान में वोट डालकर निकल रहे महेश गुप्त से जैसे ही मैं पलड़ा भारी होने का सवाल करता हूं, दुर्घटना में एक पैर गवां चुके महेश वैशाखी पर अपने शरीर को सीधा करते हए दो टूक कहते हैं, ‘मोदी को।’ क्यों के सवाल पर कहते हैं, ‘पाकिस्तान व चीन को सबक सिखाने के लिए।’
नंबर दो पर रह सकते हैं केजरीवाल
यहीं बगल में एक दुकान के बाहर चबूतरे पर बैठे चार मित्र आपस में उलझे हुए हैं। बहस केजरीवाल व अजय राय में नंबर दो पर हो रही है।
अपने-अपने तर्कों से इसका फैसला कर रहे इन लोगों के बीच बहस बनारसी भाषा शैली में पहुंच जाती हैं। दो यह मानने को तैयार नहीं कि मोदी का कोई मुकाबला कर पाएगा तो शेष दो में एक केजरीवाल को तो एक अजय राय के नंबर दो पर आने की जिद पकड़े था।
मोदी समर्थकों का तर्क था कि मोदी जीतेंगे तो बनारस ही नहीं देश बदलेगा। दूसरों की केजरीवाल व अजय राय से ऐसी ही अपेक्षा थी।
काशी देगा देश को प्रधानमंत्री
पाण्डेयपुर से वरुणा की तरफ आगे बढ़ता हूं तो रास्ते में मिल जाती हैं 70 वर्षीय रुक्मी देवी। पूछने पर बताती हैं कि पूरे मोहल्ले के लोग मोदी को वोट दे रहे हैं। हम भी दे आए हैं।
मोदी को ही वोट देने की वजह पूछने पर बताती हैं कि मोहल्ले वाले कह रहे थे कि मोदी पूरे देश को चलाएंगे। हमारी गंगा मैया को साफ कराएंगे। कुछ और आगे बढ़ने पर मुलाकात होती है कि राजेन्द्र सिंह से।
सेवानिवृत्त कर्मचारी राजेन्द्र भी मोदी की जीत की घोषणा करते दिखे। कहा, ‘यह शहर उत्तरी विधानसभा है। यहां मोदी नंबर एक पर चल रहे हैं और नंबर दो पर अजय राय। केजरीवाल तीसरे नंबर पर हैं।’ इसके लिए जातियों की गणित भी समझाते हैं। मोदी को क्या विकास के नाम पर वोट मिला है? वह तपाक से जवाब देते हैं, ‘नहीं।’
बनारस के लोगों को विकास चाहिए ही नहीं। जैसे ही कोई सड़क या पुल बनने की बात आती है, लोग आंदोलन करने लगते हैं। मोदी को वोट तो इसलिए मिल रहा है, जिससे काशी को भी देश को प्रधानमंत्री देने का गौरव मिल जाए।
इसे क्या कहेंगे
जगतगंज से होते हुए लहुराबीर की तरफ बढ़ता हूं तो रास्ते में क्वींस कॉलेज पर रुक जाता हूं। वोट देकर बाहर निकल रहीं प्रज्ञा से वोटों के रुझान के बारे में पूछता हूं।
लखनऊ में सरकारी नौकरी कर रहीं प्रज्ञा यह नहीं बताती कि उनका वोट कहां गया है। पर, जो कुछ बताती हैं कि उससे यह अनुमान लग जाता है कि उनका वोट भी मोदी को गया है।
कहती हैं कि मोदी ही जीतेंगे। विकास की बात पर कहती हैं, ‘बनारस में विकास के लिए तानाशाह चाहिए। लोकतांत्रिक व्यक्ति नहीं। मोदी यह भी कर सकते हैं।’
केजरीवाल से उम्मीदें
मतदान देने आए लोगों की अपेक्षाएं सिर्फ मोदी से ही नहीं थी। पिसनहरिया मतदान केंद्र पर आनंद मिश्र ने तर्क दिया कि वह पिछले 30 वर्षों से वोट दे रहे हैं। सबको देख लिया।
इस बार उन्होंने केजरीवाल को वोट दिया है। यहीं पर मैकूलाल चौरसिया कहते हैं कि मोदी ने सड़क नहीं बनवाई। इसलिए उन्होंने अपना वोट कैलाश चौरसिया को दिया है, क्योंकि उन्होंने सड़क बनवाने को कहा है।
कठिया बाबा के आश्रम के पास रहने वाले वीरू ने बताया कि उनके इलाके में वोट बंटा है।
सभी को वोट मिले हैं। अपने वोट के बारे में कहा कि उनका मत कांग्रेस को गया है। उनके पड़ोस के कुछ लोग केजरीवाल को वोट देकर आए हैं। कारण पूछने पर कहा कि मोहल्ले में लोग कह रहे थे कि मोदी को कहां ढूंढेंगे। ऐसे को वोट दो जो मिल जाए।
घर-घर में बंट गए वोट
लहुराबीर से गोलघर पहुंचता हूं। गोलघर स्कूल पर वोट डालकर निकले असलम कहते हैं कि उन्होंने पहली बार वोट दिया है और साइकिल को दिया है।
लड़ाई के बारे में पूछने पर बताते हैं कि उनके यहां 15 वोट हैं। जिनमें कुछ केजरीवाल को तो कुछ साइकिल को गए हैं। दशाश्वमेघ घाट से पहले मुलाकात होती है, मोतीलाल चौरसिया से।
कहते हैं कि उनके घर के कुछ वोट साइकिल को तो कुछ मोदी को गए हैं। ऐसा क्यों तो वह बताते हैं कि कैलाश भैया के उनके ऊपर एहसान है। पर, घर वाले कुछ लोग मोदी को वोट देना चाहते थे। इसलिए मोदी को भी वोट मिल गए।
वास्तव में क्या हुआ है,यह तो नतीजे बताएंगे। पर, जिस तरह मोदी का रास्ता रोकने के लिए केजरीवाल व अजय राय संघर्ष करते दिखे हैं, उसके मद्देनजर काशी के नतीजों को लेकर भी लोगों में दिलचस्पी बढ़ गई है।