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संघ ने इशारे में कहा, काशी से लड़ेंगे नमो

Mon, 17 Feb 2014 12:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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हालांकि वाराणसी में हुई समन्वय बैठक में संघ प्रमुख ने मोदी का नाम तो नहीं लिया, पर उन्होंने जिस तरह युवा नेताओं को कमान सौंपने का समर्थन किया, उसका सीधा लाभ मोदी के पक्ष में ही जाता दिख रहा है।
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शायद इसीलिए लोगों को लग रहा है कि इन बातों का मकसद मोदी के लिए काशी में संभावनाएं तलाशना है। बैठक में आम आदमी पार्टी ‘आप’ को लेकर भी फिक्र मुखर हुई।

जानकारी के मुताबिक, संघ परिवार के विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रमुख लोगों ने संघ प्रमुख से अनौपचारिक बातचीत में मोदी को वाराणसी से लड़ाने का आग्रह किया।

इशारे में दिया जवाब

संघ प्रमुख ने मोदी का नाम लेकर सीधे-सीधे तो कोई आश्वासन नहीं दिया, पर यह जरूर कहा कि वे काशी के लोगों की इस इच्छा को उचित मंच पर रखेंगे।

दरअसल, मोहन भागवत शुरू से ही युवा नेतृत्व के पक्षधर रहे हैं। संघ प्रमुख बनने के बाद उन्होंने कई बार युवा नेतृत्व को कमान सौंपने का आह्वान भी किया है।

अब देखने वाली होगी कि वह इस बार कैसी रणनीति तय करते हैं।

कुछ इस तरह कही भागवत ने बात

भागवत ने बैठक में जो बातें कहीं, उनसे साफ हो गया कि उनकी जुबान पर भले ही मोदी का नाम न आया हो लेकिन दिमाग में मोदी का रास्ता आसान बनाने की ही चिंता हलचल मचाए है।

उन्होंने कहा कि फलदार पेड़ की जड़ मजबूत होगी तो वह बढ़ेगा भी और फल भी देगा। इसलिए जड़ की चिंता करना जरूरी है। इससे यह साफ हो गया कि वे संगठन के मौजूदा ढांचे से निश्चिंत नहीं हैं।

वे चाहते हैं कि संघ से लेकर संघ परिवार के सभी संगठन अपने-अपने ढांचे को दुरुस्त करें और जनता के बीच अपनी पकड़ व पैठ मजबूत बनाएं।

भाजपा को भी मिली नसीहत

बैठक में भागवत इशारों-इशारों में भाजपा को नसीहत देने से भी नहीं चूके। साथ ही भाजपा में दागियों को जगह देने पर भी अपनी नाराजगी भी जता दी।

उन्होंने समझाया कि लोगों का समर्थन पाने की पहली अनिवार्य शर्त बेदाग होना है। इसके साथ दृढ़ता और विनम्रता भी जरूरी है। इनकी अनदेखी करके लक्ष्य नहीं हासिल किया जा सकता।
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आप का असर भी दिखा

बैठक में शामिल लोगों पर आम आदमी पार्टी ‘आप’ का असर भी दिखाई दिया। एक सवाल आया कि ‘आप’ के कारण चुनाव में होने वाले नुकसान से बचने के लिए क्या करना होगा?

सरसंघचालक ने इसका सीधा जवाब नहीं दिया। कहा, ‘एक समय महाराष्ट्र में शरद जोशी बहुत बड़े नेता हुआ करते थे, पर आज वह कहां हैं। उनका प्रभाव सीमित क्षेत्र में सिमट कर रह गया।

इसलिए लोगों के आवेश व भावनाओं को आधार बनाकर मुकाम हासिल करने की कोशिश ठीक नहीं होती। रही बात संघ की, तो हमारा समर्थन सिर्फ देशहित के लिए काम करने वाले व्यक्ति व संगठन को ही है’।
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