अगर आपकी गाड़ी के शीशे पर गोल्ड नैनो पार्टिकल की पर्त चढ़ी हुई है तो उस पर न तो कोहरे व धुंध का असर होगा और न ही धूल से वह गंदा होगा।
यही नहीं, कपड़े पर अगर गोल्ड नैनो पार्टिकल व सिलिकॉन नैनो पार्टिकल की पर्त चढ़ाई जाए तो वह कभी गीले नहीं होंगे। यह विचार डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (डीआरडीओ) के अधिकारी डॉ. आरबी शर्मा ने व्यक्त किए।
मौका था रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय में फिजिक्स डिपार्टमेंट द्वारा नैनो टेक्नोलॉजी एंड मैटेरियल साइंस पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार का।
उन्होंने कहा कि नैनो टेक्नोलॉजी से आने वाले समय में काम करना आसान होगा और इंडस्ट्री इसका अधिक से अधिक प्रयोग कर बेहतर रिजल्ट दे सकेगी।
कार्यक्रम में शारदा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एनबी सिंह ने कहा कि 21 वीं शताब्दी नैनो टेक्नोलॉजी की है। इस टेक्नोलॉजी का सबसे अधिक उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, कॉस्मेटिक का सामान बनाने में और मेडिकल ड्रग डिलिवरी में किया जा रहा है।
प्रो. सिंह ने कहा कि रोगों के कारगर इलाज के लिए नैनो मैटेरियल का प्रयोग किया जा रहा है। इसमें डीएनए रोबोट बनाकर नैनो मैटेरियल के साथ दवा शरीर में प्रवेश करवाई जाती है।
इससे वह शरीर में उसी हिस्से पर असर करती है जो रोगग्रस्त होता है। कैंसर के इलाज में इसका कारगर प्रयोग किया जा रहा है।
लखनऊ विवि में फिजिक्स विभाग के प्रोफेसर एनके पांडेय ने कहा कि बायोटेक और बायोमेडिकल में इसका काफी प्रयोग किया जा रहा है।इसकी सहायता से हम यह भी जान सकते हैं कि अनाज और फल कब पककर तैयार हो जाएगा।