लखनऊ। नगर निगम घैला में गोमती नदी के किनारे नमो वन नहीं बना सकेगा। जमीन का कानूनी विवाद सामने आया है। नगर निगम की टीम जब मौके पर काम करने गई तो कानूनी अड़चन सामने आई। अब दूसरी जगह जमीन तलाश की जा रही है।
करीब दो हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर नगर निगम ने घैला में 13 एकड़ से अधिक जमीन को नमो वन बनाने के लिए चिह्नित किया था। 18 सितंबर को महापौर सुषमा खर्कवाल ने अफसरों के साथ जमीन का निरीक्षण भी किया था। इसके बाद जब नगर निगम उद्यान विभाग की टीम ने मौके पर काम शुरू किया तो लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जमीन उनकी है और इसे लेकर राजस्व विभाग से कानूनी विवाद भी चल रहा है, जिसके बाद अब नगर निगम ने वहां काम रोक दिया है और दूसरी जगह जमीन तलाश शुरू कर दी है।
यह है योजना
नमो वन में घने वृक्षों के साथ ही तितलियों को आकर्षित करने वाले पौधे, बांस की संरचनाएं, वाटर बाॅडी, ओपन जिम और बर्ड-फ्रेंडली गार्डन तैयार किए जाएंगे। बच्चों और पर्यटकों के लिए शैक्षिक केंद्र भी बनाए जाएंगे, जहां उन्हें पेड़-पौधों और पर्यावरणीय चक्रों की जानकारी दी जाएगी। इसके निर्माण पर करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्राकृतिक कैफेटेरिया भी बनेगा
नमो वन में हरे-भरे घास के मैदान को डिजाइन कर प्राकृतिक कैफेटेरिया भी तैयार किया जाएगा। यहां कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। बैठने के लिए घास की बनावट और सजावट की जाएगी। यहां आने वाले लोगों को लगेगा, जैसे वे किसी प्राकृतिक उद्यान में भोजन कर रहे हों। इस कैफेटेरिया में स्थानीय और ऑर्गेनिक उत्पादों से बनी वस्तुएं भी उपलब्ध कराने की योजना है। नागरिकों की सुविधा के लिए एक सुसज्जित जॉगिंग ट्रैक भी बनाया जाएगा, जिससे लोग हरियाली के बीच सुबह-शाम व्यायाम और सैर का आनंद ले सकेंगे।
Iघैला में जो जमीन चिह्नित की गई थी, उसके कुछ हिस्से में कानूनी विवाद है। ऐसे में दूसरी जगह पर जमीन तलाशी जा रही है। संपत्ति विभाग ने कई जमीनें बताई हैं, जिनको मौके पर जाकर देखा जा रहा है। यह पता किया जा रहा है कि कहीं पर कोई विवाद तो नहीं है।
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- शशिकांत, उद्यान अधीक्षक, नगर निगमI