युवती को विक्षिप्त बता रही पुलिस के दावे को ग्रामीणों ने नकारते हुए कहा कि युवती के शव को देखकर साफ लग रहा था कि वह किसी अच्छे परिवार से है। उसके शरीर पर कहीं कोई चोट का निशान नहीं था। उसका चेहरा व सिर बुरी तरह से कूचा गया था। साथ ही आसपास दुर्घटना जैसे कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं और न ही शव के आसपास खून के छींटे तक मिले। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसा लगता है कि युवती की पहचान मिटाने के लिए सिर को बुरी तरह से कूचा गया था।
पहचान कराने के बजाए ग्रामीणों को पुलिस ने रोका
ग्रामीणों ने बताया कि सूचना पर पहुंची पुलिस ने राहगीरों और ग्रामीणों को शव के पास आने से रोक दिया और आनन-फानन शव को सील कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शव की पहचान कराने की भी पुलिस ने कोई कोशिश नहीं की।
इंस्पेक्टर निगोहां ने अधिकारियों को भी इलाके में घूमने वाली विक्षिप्त के शव मिलने की सूचना दी जबकि ग्रामीणों ने दावा किया है कि उनके इलाके में पिछले दिनों में ऐसी या इस उम्र की कोई युवती कभी देखी ही नहीं गई। लेकिन पुलिस मानने को तैयार नहीं है।
किसी वाहन से लाकर शव फेंके जाने की आशंका
आसपास के ग्रामीणों ने कहा कि जिस हिसाब से शव सड़क पर मिला है, उससे तो यही लगता है कि युवती के शव को लखनऊ की तरफ से किसी वाहन से लाकर मस्तीपुर गांव के बाहर सुनसान जगह पर फेंककर कुछ ही दूरी पर बने कट से गाड़ी घुमाकर शव फेंकने वाले भाग गए होंगे।