रौजा ए काजमैन में मजलिस को खिताब करते मौलाना अब्बास इरशाद नकवी।
लखनऊ। पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल. के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत के दसवें पर बुधवार को घरों में नज्र हुई। कर्बला व इमामाबाड़ों में अजादारों ने मातम कर गम मनाया। अलम व ताबूत की जियारत कर अजादारों ने आंसू बहाए।
घरों में शहीदाने कर्बला की नज्र दिलाकर पुरसा दिया गया। सआदतगंज स्थित रौजा-ए-काजमैन में मजलिस को मौलाना अब्बास इरशाद नकवी ने खिताब किया। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन दर्दनाक शहादत और उनके मासूम बेटे हजरत अली असगर को तीर लगने का मंजर बयान किया। मजलिस के बाद अंजुमन काजमिया आब्दिया ने नौहाख्वानी की। फिर अलम व ताबूत की जियारत कराई गई। शहर के तमाम इमामबाड़ों व कर्बला में मजलिस का सिलसिला चलता रहा।
दहकते अंगारों पर किया मातम
बाबुल मुराद कमेटी की ओर से टूरियागंज स्थित कर्बला पुत्तन साहब में आग का मातम किया गया। या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के बीच बच्चे, बूढ़े और नौजवानों ने दहकते हुए अंगारों पर चलकर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। इससे पहले कर्बला की मजलिस में मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बाद यजीदी फौज ने इमाम के खेमों में आग लगा दी थी। इसी की याद में आग पर मातम किया जाता है।