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Lucknow News: एफआईआर के खिलाफ नायब तहसीलदार व लेखपालों ने भी खोला मोर्चा

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लखनऊ। अर्जुनगंज इलाके के मस्तेमऊ गांव में डेढ़ करोड़ रुपये की सरकारी जमीन से कब्जा हटाने के दौरान किसान को थप्पड़ मारने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। किसानों के विरोध प्रदर्शन के बाद नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार और लेखपाल सुभाष कौशल पर एफआईआर दर्ज हुई, तो अब नगर निगम के संपत्ति विभाग में तैनात नायब तहसीलदार और लेखपाल भी खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
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निगम कर्मियों ने एफआईआर निरस्त करने की मांग को लेकर नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि अगर इस तरह कार्रवाई करने वालों पर ही मुकदमे होंगे तो सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना नामुमकिन हो जाएगा। सोमवार को लेखपाल नगर निगम मुख्यालय पर धरना भी देंगे। इसके अलावा महापौर, मंडलायुक्त, डीएम और कर्मचारी संगठनों को भी पत्र भेजा गया है।
छह महीने पहले जारी हुआ था नोटिस
नायब तहसीलदार रत्नेश कुमार का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमों के तहत हुई। कब्जेदार राममिलन को फरवरी में ही नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 23 अप्रैल को पुलिस बल के साथ टीम पहुंची, लेकिन महिलाओं को आगे कर गाली-गलौज और अभद्र भाषा के चलते माहौल बिगड़ गया और टीम को लौटना पड़ा।
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प्रॉपर्टी डीलरों की साजिश का आरोप
रत्नेश कुमार के मुताबिक, 25 अगस्त को पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया गया। उसी दौरान हाथापाई और गाली-गलौज भी हुई, मगर एक महीने बाद 28 सितंबर को गलत आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करा दी गई। उनका कहना है कि प्रॉपर्टी डीलरों की भी बैकडोर से इसमें मिलीभगत है, क्योंकि जमीन कीमती है। लेखपाल सुभाष कौशल उस दिन मौके पर मौजूद भी नहीं थे, लेकिन साजिशन उनका नाम भी मुकदमे में डाल दिया गया।
थप्पड़ मारने के वायरल वीडियो पर रत्नेश का कहना है कि वह महज कुछ सेकेंड का है, जबकि कब्जेदार लगातार गाली-गलौज कर रहा था। हाथापाई भी की थी। पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है।
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