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Lucknow News: केजीएमयू ट्राॅमा सेंटर में बढ़ेंगे 40 वेंटिलेटर

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केजीएमयू ट्राॅमा सेंटर 
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लखनऊ। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्राॅमा सेंटर में वेंटिलेटर की मारामारी में थोड़ी कमी आने की उम्मीद है। संस्थान ने ट्राॅमा सेंटर में 40 अतिरिक्त वेंटिलेटर का प्रस्ताव भेजा है। इसके बाद यहां करीब सवा साै वेंटिलेटर हो जाएंगे।
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केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पर मरीजों का काफी दबाव है। यहां रोजाना करीब 10 से 12 मरीजों को वेंटिलेटर नहीं मिल पाता है। इस समय यहां 82 वेंटिलेटर हैं। केजीएमयू प्रशासन ने अब शासन के पास 40 वेंटिलेटर बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा है।


डाॅक्टर को अतिरिक्त समय देता है वेंटिलेटर
वेंटिलेटर उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जो अपने आप सांस नहीं ले पाते हैं। इसकी सहायता से फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है। मरीज की सांस चलते रहने पर डाॅक्टर को उसके इलाज के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है।
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केंद्रीकृत रेफरल सिस्टम से बनेगी बात
राजधानी में वेंटिलेटर के अभाव में आए दिन मरीजों को जान गंवानी पड़ती है। मरीज को इधर-उधर ले जाने वाले समय की बर्बादी रोकने के लिए कोविड महामारी के बाद केंद्रीकृत रेफरल सिस्टम बनाने की कवायद शुरू हुई थी। इसमें खाली बेड की ब्योरा ऑनलाइन नजर आता। इससे सीधे मरीज को उसी सेंटर पर भेजा जा सकता। अभी तक यह व्यवस्था व्यवहार में नहीं आ सकी है। इसलिए आए दिन वेंटिलेटर न मिलने की सूचना आती रहती है।


पांच से 15 दिन तक का है वेंटिलेटर पर रहने का औसत
ट्रॉमा सेंटर के उप चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. अमिय अग्रवाल ने बताया कि वेंटिलेटर पर एक मरीज को औसतन पांच से 15 दिन रहना पड़ता है। इससे वेंटिलेटर की किल्लत हमेशा रहती है। वेंटिलेटर उपलब्ध होने पर मरीजों को वापस करना पड़ता है।
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