पांच साल बाद ही सही लेकिन नगर निगम को रायबरेली रोड
स्थित ओमेक्स सिटी की पांच बीघा तालाब की जमीन याद आई है।
नगर निगम ने
आननफानन में नोटिस जारी करते हुए तीन दिन में तालाब की भूमि से अवैध कब्जा
हटाने को कहा है। नगर निगम की ओर से पांच साल पहले निजी कंपनी को नोटिस
जारी की गई थी कि वह तालाब के स्वरूप केसाथ छेड़छाड़ न करे।
सर्वोच्च
न्यायालय के आदेश के तहत तालाब की जमीन पर निर्माण नहीं किया जा सकता इसलिए
उसे उसके स्वरूप में लाया जाए। उस समय नगर निगम की इस नोटिस का कोई असर
नहीं हुआ।
दी तीन दिन की मोहलत
अब पांच साल बाद नगर निगम ने फिर ओमेक्स को तालाब की जमीन से
कब्जा हटाने केलिए नोटिस जारी की है। जिसमें तीन दिन के अंदर तालाब की जमीन
को उसके पुराने स्वरूप में लाने का समय दिया गया है।
उच्च
न्यायालय की फटकार के बाद शासन एक बार फिर तालाब, पोखर, श्मशान, चकरोड की
जमीनों का सर्वे करा रहा है। इसके तहत तहत नगर निगम भी इन दिनों उक्त
जमीनों पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी कर रहा है।
नगर निगम के प्रभारी
अधिकारी सम्पत्ति अजीत कुमार सिंह ने बताया कि ओमेक्स सिटी में करीब पांच
बीघा जमीन तालाब की है। ओमेक्स सिटी परिसर के अंदर ग्राम औरंगाबाद खालसा की
खसरा संख्या 1465 और ग्राम औरंगाबाद जागरी की खसरा संख्या 1211,
1250, 1251,1598 व 1683 की जमीन दस्तावेज में तालाब दर्ज है।
ओमेक्स ने की मनमानी
इस
पर ओमेक्स द्वारा निर्माण कर तालाब की जमीन का स्वरूप बदला जा रहा है।
इसको लेकर पांच साल पहले 2008 में भी ओमेक्स सिटी प्रबंधन को नोटिस जारी की
गई थी कि वह तालाब की जमीन को उसके स्वरूप में रहने दे।
उसके बाद भी कंपनी
ने तालाब की जमीन को उसके स्वरूप में नहीं किया।
इसी कारण अब फिर नोटिस
जारी की जा रही है कि तीन दिन के अंदर निजी कंपनी तालाब की जमीन से कब्जा
हटाकर उसे उसकेस्वरूप में लाए। ऐसा नहीं करने पर कंपनी केखिलाफ कार्रवाई की
जाएगी।