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यूपी: नगर निगम ने कब्जे में लिया आजम खान की बहन को आवंटित बंगला, 15 दिन में खाली करने का दिया था निर्देश

Mon, 02 Nov 2020 01:17 PM IST
ishwar ashish प्रवेंद्र गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
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आजम खान की बहन के बंगले पर नगर निगम की टीम ने लगाया ताला। - फोटो : amar ujala
समाजवादी पार्टी के सांसद और पूर्व नगर विकास मंत्री आजम खान की बहन के बंगले का आवंटन निरस्त करने के बाद नगर निगम ने सोमवार की सुबह ही बंगले को अपने अधिकार में ले लिया और अपना ताला लगा दिया। बीते माह 15 अक्तूबर को आवंटन निरस्त करने के बाद कब्जा आजम खान की बहन को 15 दिन में बंगला खाली करने का निर्देश दिया गया था। उसके बाद भी आजम की बहन द्वारा बंगले का कब्जा नगर निगम को नहीं दिया गया था। जिसके बाद नगर निगम की टीम ने  सोमवार खुद ही कब्जा प्राप्त कर लिया।

आजम खान की बहन निखत अफलाक को नगर निगम की रिवर बैंक कालोनी में करीब 13 साल पहले किराए पर आलीशान बंगला आवंटित किया गया था। एक शिकायत के बाद शासन से आए एक पत्र के आधार पर नगर निगम ने अगस्त माह में बंगला आवंटन निरस्त करने का नोटिस जारी किया था। आजम की बहन के जवाब से सन्तुष्ट न होने के बाद बीती 15 अक्टूबर को नगर निगम ने बंगले के आवंटन निरस्त कर दिया था और 15 दिन मोहलत नगर निगम को बंगले का कब्जा लौटाने के लिए दी थी।
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छह हजार वर्ग फीट में फैले बंगले का किराया महज एक हजार रुपये महीना था

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लखनऊ नगर निगम - फोटो : amar ujala
नगर निगम की पॉश रिवर बैंक कालोनी में आजम खान की बहन निखत अफलाक को साल 2007 में नगर निगम ने रिवर बैंक कालोनी में एक आलीशान बंगला नंबर ए-2/1 आवंटित किया था। करीब छह हजार वर्ग फिट के उस बंगले का किराया महज एक हजार रुपए महीना था। इसी बंगले को लेकर शासन में एक शिकायत हुई है।
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- फोटो : amar ujala
कहा जा रहा है कि शिकायत भी सपा सांसद की धुर विरोधी एक नेता के निजी सचिव ने की थी। उसी का संज्ञान लेते हुए शासन से नगर निगम को आदेश जारी हुआ था। जिसमें कहा गया है कि गलत तरीके से आवंटित किए गए बंगले का आवंटन जांच कर निरस्त किया जाए।

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- फोटो : amar ujala
जिसके बाद नगर निगम की ओर से मौके की जांच कराए जाने के बाद आवंटन निरस्तीकरण की नोटिस बीती 24 अगस्त को जारी की गई थी जिसमें यह कहा गया था कि जांच के दौरान बंगला बंद मिला। उसमें कोई नहीं रहता है साथ ही यह भी कहा गया था कि निखहत अफलाक रामपुर के सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं और रिटायर होने के बाद वहीं पर रहती हैं। वहीं, निखहत अफलाक की तरफ से भी दिए गए जवाब पर नगर निगम संतुष्ट नहीं हुआ था।
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- फोटो : amar ujala
इस आधार पर हुआ आवंटन निरस्त
नगर निगम की ओर से यह आधार बनाते हुए आवंटन निरस्त कर गया था कि जब निखहत अफलाक को बंगला आवंटित हुआ था तब वह किसी सरकारी सेवा में नहीं थीं और न ही लखनऊ में कार्यरत थीं। ऐसे में जो आवंटन हुआ था वह गलत था।
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