इंदिरानगर में नगर निगम ऐसी कई बड़ी कॉलोनियों में सड़कों, नालियों का काम करवा रहा है, जिन्हें एक निजी बिल्डर बनाकर बेच रहा है। वहीं, जिन इलाकों में इन सुविधाओं की जरूरत है वहां काम नहीं हो रहा है। इससे पहले जल निगम बिल्डर की ऐसी कॉलोनियों में सीवर, पानी की लाइन बिछा चुका है। इसे लेकर सवाल भी उठे हैं।
इंदिरा प्रियदर्शिनी वार्ड और इससे लगी बिल्डर की महंगी कॉलोनियों पर नगर निगम मेहरबान है। ये वे कॉलोनियां हैं, जहां पुरानी आबादी नहीं है। आम जनता के टैक्स के पैसे से यहां सड़कें और नालियां बनाई जा रही हैं। इससे बिल्डर को फायदा पहुंच रहा है। सुविधाओं का हवाला देकर वह ऊंची कीमत पर मकान बेच रहा है। इससे पहले जल निगम भी जेएनएनयूआरएम योजना में बिल्डर की दूसरी कॉलोनी में खाली पड़ी जमीनों पर सीवर, पानी की लाइन बिछा चुका है। इससे उसे करोड़ों का लाभ हुआ है। जिन सुविधाओं पर उसे खुद पैसा खर्च करना था, वह मुफ्त में सरकारी पैसे से मिल गई।
जमीन देने की भी हो चुकी है कोशिश
करीब छह महीने पहले इंदिरानगर क्षेत्र के इसी बिल्डर को नगर निगम की कीमती जमीन देने का भी प्रस्ताव कार्यकारिणी और सदन में लाया गया था। हालांकि, विवाद होने पर यह पास नहीं हो सका। प्रस्ताव भी बिल्डर के बजाय एक पार्षद की ओर से लाया गया था। इसमें बिल्डर की एक बड़ी कॉलोनी में अलग-अलग नगर निगम की जमीन उसे देने का प्रस्ताव था। इसके बदले एक जगह पर नगर निगम को जमीन मिलनी थी। इसे लेकर सवाल उठे, जिस कारण प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया। अब उसे दूसरे तरीके से लाभ पहुंचाया जा रहा है।
....इधर चार महीने से खुदी है गली
नगर निगम बिल्डरों की बस रहीं कॉलोनियों में सड़कें बना रहा है, वहीं आलमबाग के नटखेड़ा में एक गली चार महीने से खुदी पड़ी है। इससे रोजाना सैकड़ों लोगों का आना-जाना है। गली खुदी होने से लोग चोटिल भी हो रहे, पर इसे नहीं बनवाया जा रहा है। स्थानीय व्यवसायी मनीष अरोड़ा कहते हैं कि इसी गली में एक मंदिर भी है। यहां आने वाले भक्तों को भी सड़क न बनने से परेशानी होती है। ऐसे ही कई अन्य इलाकों में सड़कों का बुरा हाल है।
निजी बिल्डरों की विकसित हो रहीं कॉलोनियों में सड़क-नाली का काम कराने का नियम नहीं है। जो कॉलोनी हैंडओवर होती हैं, वहां की बात अलग है। यदि किसी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कराया जा रहा है तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई भी की जाएगी।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त