ऑल इंडिया लीगल एड फोरम ने राजधानी में शनिवार को एक प्रेसवार्ता आयोजित की।
इसमें फोरम के महासचिव जॉयदीप मुखर्जी ने कहा कि रूस की खुफिया एजेंसी रही केजीबी के पास नेताजी से जुड़े 100 से अधिक दस्तावेज हैं।
वे खुद रूसी सरकार के अधिकारियों और राजनेताओं से मिले हैं जिनकेअनुसार भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर कभी ये दस्तावेज नहीं मांगे।
ऐसे में वे इन्हें उपलब्ध नहीं करवा सकते। मुखर्जी कहते हैं, पता नहीं, भारत सरकार केजीबी की रिपोर्ट मंगाने के लिए रूस को क्यों नहीं लिख रही।
तो क्या रूस में कैद हैं नेताजी?
मुखर्जी ने मांग उठाई है कि आम चुनाव के दौरान राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में यह बात भी शामिल करें कि वे रूस को नेताजी पर तैयार की गई केजीबी की रिपोर्ट देने के लिए लिखेंगी और मिलने पर उन्हें सार्वजनिक करेंगी।
मुखर्जी ने कहा नेताजी की मौत को लेकर आज भी भारतीय नागरिक असलियत जानना चाहते हैं, लेकिन भारत सरकार इन्हें छिपाती रही है।
ऐसा ही लाल बहादुर शास्त्रीजी की मौत और श्यामाप्रसाद मुखर्जी की कश्मीर में मौत को लेकर भी यही रुख अपनाया जाता है।
उन्होंने कहा द्वितीय विश्वयुद्ध में जब जापान की हार हुई तो नेताजी को ब्रिटिश सरकार व अमेरिकी सरकार से खतरा था, ऐसे में उन्होंने निरपेक्ष देश रूस जाना चुना।
हालांकि रूस में उन्हें बंदी बनाए जाने की असत्यापित जानकारियां मिली हैं।
मौत की जांच के लिए क्यों नहीं गठित हुई कमेटी
केजीबी के यदा-कदा जाहिर हुए खुफिया दस्तावेजों, जिनमें 50 के दशक के फॉरवर्ड ब्लॉक महासचिव चित्रो बोस को दिया गया दस्तावेज भी शामिल है, में सुभाषचंद्र बोस को रेड आर्मी द्वारा कैद में रखने की बात सामने आती है।
1953 में स्टालिन की मृत्यु के बाद भारत-रूस संबंधों में दोस्ती का आगाज हुआ।
सवाल 01
क्या नेताजी सुभाषचंद्र बोस 1956 तक जीवित थे और रूस ने उन्हें बतौर युद्धबंदी कैद करके रखा था?
अगर नहीं, तो तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति स्टालिन ने विदेशी मामलों के सोवियत कमिश्नर व्याचेस्लाव मोटोलोव को 1946 में क्यों पूछा था कि वे बोस को कौनसी जेल में रखने जा रहे हैं?
सवाल 02
नेताजी की मृत्यु को लेकर कोई भी अधिकृत जानकारी के लिए जांच कमीशन क्यों नहीं बनाया गया?
...पर सामने नहीं आया बोस की मौत का सच
1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने नेताजी की मौत को लेकर शाहनवाज कमीशन बनाया, लेकिन इसकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई। हालांकि इसकी कुछ जानकारियां बाहर आईं, लेकिन उन्हें नकार दिया गया।
इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1972 में रिटायर्ड जस्टिस जीडी खोसला कमेटी बनाई जिसकी रिपोर्ट को भी 1977 में मोरारजी देसाई सरकार ने खारिज कर दिया।
1998 में बोस को मरणोपरांत भारत रत्न की सिफारिश केविवाद के बाद जस्टिस मनोज मुखर्जी कमीशन गठित हुआ।
इसके अनुसार बोस की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनकी मौत 18 अगस्त 1945 के हवाई हादसे में नहीं हुई थी।
न ही जापान के रेनकोजी मंदिर में रखी अस्थियां व राख बोस की हैं, जैसा कि दावा किया जाता है। भारत सरकार ने कारण बताए बगैर इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया।
केजीबी रिपोर्ट में बतौर युद्धबंदी रखे जाने की पुष्टि
दूसरी ओर 1990 में यूएसएसआर के विखंडन के बाद केजीबी की जो गुप्त रिपोर्ट जारी हुई हैं, उनके अनुसार रूस के साइबेरिया में करीब 100 ऐसे स्थान थे जहां द्वितीय विश्व युद्ध केयुद्धबंदियों को रखा गया था।
इनमें नेताजी को भी रखे जाने की पुष्टि होती है। हालांकि अधिकृत रिपोर्ट के लिए भारत सरकार को रूस को लिखना होगा।