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लखनऊ में रहस्यमयी बीमारी का आतंक बढ़ा, चार मौत के बाद 100 और मरीज अस्पताल पहुंचे

Mon, 18 Jun 2018 08:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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जांच के लिए मरीज के खून का सैंपल लेते डॉक्टर। - फोटो : amar ujala
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लखनऊ के नगराम के मुर्तजापुर में रहस्यमयी बीमारी की दहशत बढ़ती जा रही है। पिछले 48 घंटे में करीब 100 मरीज सामने आए। बीमारी को समझने में नाकाम स्वास्थ्य विभाग ने अब केजीएमयू की मदद मांगी है। वहीं सीएमओ डॉ. नरेन्द्र अग्रवाल का दावा है कि बीमारी अब पूरी तरह से काबू में है। यह कम आश्चर्य की बात नहीं कि जिस रहस्यमयी बीमारी का कारण नहीं तलाशा जा सका, बीमारी क्या है, इसका पता नहीं लगाया जा सका, उसे काबू में करने की बात की जा रही है।

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सीएमओ ने मुर्तजापुर में दो बेड का अस्थाई अस्पताल बनाया है। शिविर में शनिवार रात 28 मरीज थे, जबकि रविवार को अचानक से बड़ी संख्या में मरीज सामने आए और आंकड़ा 100 पार हो गया। किसी को पेट दर्द तो कोई मचली व बुखार से पीड़ित था। अंजली (28), प्रेम प्रकाश (48) सुंदारा (6) प्रियांशी (8), शिल्पा (22), निशा (30), इंद्राना (70), दिव्यांशी (6 माह), प्रीति (17), रुचि (16), स्नेहा (13), सीमा (20), श्यामा (70) समेत अन्य मरीज अस्थाई अस्पताल पहुंचे। शनिवार को सीएमओ ने गांव का निरीक्षण भी किया। मृतकों के घर जाकर बीमारी के लक्षणों के बारे में जानकारी ली।

अब जागा विभाग, बनाया दो बेड का अस्पताल, कई और इंतजाम
बीमार लोगों की तादाद बढ़ने से सीएमओ ने वहां पर दो बेड का अस्थाई अस्पताल भी शुरू किया है। 24 घंटे डॉक्टर, स्टाफ व एम्बुलेंस तैनात रहेगी। गांव में बीते दो दिनों में 100 मरीज देखे गए। 11 मरीजों की मलेरिया की जांच के लिए स्लाइड्स बनाई गई। एंटीलार्वा तथा ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया गया। गांव के सभी घरों में क्लोरीन की गोलियों बांटी गईं और 106 ओआरएस पैकेट वितरित किए गए। सीएमओ का दावा है कि बीमारी अब पूरी तरह से काबू में हैं।

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रहस्य से पर्दा उठाने केजीएमयू की टीम पहुंची नगराम

नगराम पहुंची डॉक्टरों की टीम। - फोटो : amar ujala
नगराम के मुर्तजापुर में फैली बीमारी का रहस्य क्या है, इसका पता लगाने के लिए केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम रविवार को पहुंची। टीम में चार विभाग के डॉक्टर शामिल हैं। वे पीड़ित परिवारों से मिले, मौत से पूर्व मरीजों के लक्षणों के बारे में बात की। बलगम, लार, खून व मूत्र के नमूने लिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि जांच के बाद ही मौत की वजह साफ होगी। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील रावत ने बताया कि केजीएमयू की टीम ने मृतकों के परिवारीजनों के खून व लार के नमूने लिए। वहीं चार मरीजों के मू़त्र के सैंपल लिए गए थे।

डॉक्टरों की टीम में केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार, मेडिसिन विभाग के डॉ. केके सलवानी, सोशल एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन विभाग की डॉ.रीमा, बाल रोग विभाग के डॉ. सिद्वार्थ, माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की डॉ.सुरुचि, डॉ. शांतनु, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. अमित भगत शामिल रहे। डॉ. शंखवार का कहना है कि जिन बच्चों की मौत र्हुई है, उनके यहां से ब्लड सैंपल लिए गए हैं। कोई गंभीर बीमारी का अंदेशा है। जांच रिपोर्ट आने में करीब एक दो दिन का वक्त लगेगा। उसके बाद ही स्थिति साफ होगी।

अब तक हो चुकी है चार लोगों की मौत
नगराम के अमवा मुर्तजापुर गांव में बीते डेढ़ हफ्ते में रहस्यमयी बीमारी से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें तीन बच्चे शामिल हैं। इन मरीजों को उल्टी-दस्त, पेट में दर्द, मुंह से झाग आना व सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। कुछ ही समय में मरीजों की मौत हो गई। मौत के बाद गांव में हड़कंप मच गया। लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या से स्वास्थ्य महकमा हरकत में आया। कारण तो नहीं ढूंढ पाया, लेकिन कैंप लगाए जाने लगे। लाल-पीली गोलियां बांटी जाने लगीं। ग्रामीणों के हंगामे के बाद घरों से पानी के नमूने एकत्र किए। खून के नमूने एकत्र किए। इसमें मलेरिया, उल्टी-दस्त समेत दूसरी बीमारी की जांच कराई गई, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई।
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इधर, जान गंवाने वाले सुजान की एक और बहन की हालत बिगड़ी, भर्ती

नगराम में बनाया गया दो बेड का अस्पताल। - फोटो : amar ujala
मुतर्जापुर में रहस्यमयी बीमारी से बीती 5 जून को जान गंवाने वाले सुजान बाबू (13) की बड़ी बहन सुनैचा (16) की हालत भी बिगड़ गई है। शनिवार देर रात उसे बेहोशी की हालत में परिवारीजन सीएचसी ले गए। सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश ने उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया। हालांकि बाद में उसे होश आ गया।

मुर्तजापुर निवासी उदयशंकर के बेटे की तबीयत 5 जून को घर के बाहर खेलते वक्त बिगड़ी थी। उसे अचानक घबराहट हुई और नाक से खून व मुंह से झाग निकलने लगा। सीएचसी से उसे केजीएमयू रेफर किया गया, पर रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

सुजान की बहन सुनैया (14) पहले से ही बीमार थी। उल्टियां, सिर व बदन दर्द होने पर निजी अस्पताल में दिखाया गया। बाद में उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया और तबीयत ठीक होने पर छुट्टी कर दी गई। फिर तबीयत बिगड़ने पर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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