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'मुज़फ्फरनगर गुजरात दंगों की तरह नहीं'

Thu, 28 Nov 2013 04:42 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर करते हुए कहा है कि मुजफ्फरनगर दंगों की तुलना 2002 के गुजरात दंगों से नहीं की जा सकती है।
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सरकार ने यह हलफनामा सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में हुए मुज़फ्फरनगर सहित सभी दंगों की सीबीआई जांच कराए जाने संबंधी पीआईएल में दिया है।

गृह सचिव कमल सक्सेना द्वारा दायर हलफनामे में राज्य सरकार के कार्यों का बचाव करते हुए इस बात से इनकार किया गया है कि सरकार के कर्मचारियों ने किसी धर्म-विशेष के प्रति पक्षपात किया है।
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राज्य सरकार ने इस बात को भी पूरी तरह गलत बताया है कि मुज़फ्फरनगर दंगे 27 अगस्त 2013 के छेड़छाड़ और तिहरे हत्याकांड से जुड़ा हुआ है।

पथराव और आगजनी से इनकार
यहां तक कि मृतकों की अंत्येष्टि के बाद पथराव और आगजनी, 30 अगस्त को जुमे की नमाज़ के बाद शहीद चौक पर भारी भीड़ के जमा होने तथा 31 तारीख को जाट समुदाय द्वारा पंचायत आयोजित किए जाने जैसे अभिलेखों पर उपलब्ध तथ्यों को भी राज्य सरकार ने हलफनामे पर इनकार किया है।

कई सारी घटनाएं होती रहती हैं
डॉ. ठाकुर ने आरोप लगाया था कि मार्च, 2012 के बाद राज्य में कई साम्प्रदायिक दंगे हुए। इस पर हलफनामे में कहा गया है कि यूपी देश के सबसे बड़े राज्यों में है। इसीलिए, कानून व्यवस्था संबंधित कई सारी घटनाएं होती ही रहती हैं। इनसे तेजी से निपटा भी जाता है।
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हालांकि, सरकार ने मथुरा, प्रतापगढ़, बरेली, फैजाबाद सहित कई दंगों के संबंध में प्रस्तुत ढिलाई के बारे में हलफनामे में कोई भी तथ्यपरक बात नहीं बताई है।

शिया-सुन्नी दंगों पर भी खामोशी
हलफनामे में लखनऊ पुलिस द्वारा 18 अगस्त, 2012 को म्यांमार और असम में मुस्लिमों पर किये गए उत्पीड़न के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में बुद्धा पार्क में हुई तोड़फोड़ और जुलाई 2013 में शिया-सुन्नी दंगों में की गई कमजोर कार्यवाही के संबंध पर भी स्थिति साफ नहीं की गई है।
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