कांग्रेस, भाजपा, सपा और बसपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अधिकतर सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। अधिकतर भाजपा से अपनी लड़ाई बता रहे हैं।
इन दलों की लिस्ट देखने साफ है कि प्रत्याशियों के चयन में न सिर्फ क्षेत्र, जाति व धर्म के प्रभाव को ध्यान में रखने की कोशिश हुई है बल्कि कई सीटों पर हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण का भी सपना संजोया गया है।
मगर इस सियासी रणनीति में कई सीटे ऐसी उभर कर सामने आई हैं जहां कई प्रमुख दलों ने आमने-सामने दमदार मुस्लिम प्रत्याशी उतार दिए हैं।
लोकसभा के चुनावी समर में कांग्रेस हो या सपा अथवा बसपा, ‘मोदी रोको’ मुहिम में एक दूसरे से बढ़कर साबित करने की होड़ है।
गुजरात दंगे के बहाने मोदी की मुस्लिम विरोधी छवि को उभारकर मुस्लिमों का ध्रुवीकरण कराने की तैयारी है।
इसके लिए कई सीटों पर सभी प्रमुख गैर भाजपा दलों ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारे हैं। पश्चिम से लेकर पूरब तक देखें तो कई सीटें ऐसी हैं जहां दो-दो प्रभावशाली मुस्लिम प्रत्याशी हैं।
कई ऐसी भी जहां तीन-तीन दमदार मुस्लिम चेहरे सामने हैं। अब ध्रुवीकरण की धुन में तल्लीन मुस्लिम मतदाता अपने को कहीं दोराहे पर तो कहीं तिराहे पर खड़ा पा रहा है। देखने वाली बात होगी प्रत्याशी ध्रुवीकरण की चाल में पास होते हैं?