सेमिनार में मौजूद राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी और कुलपति प्रो. अजय तनेजा। -संवाद
लखनऊ। अल्पसंख्यक समाज के युवाओं के लिए भाषा शिक्षा को रोजगार से जोड़ना वक्त की जरूरत है। अरबी के साथ अगर अंग्रेजी, कंप्यूटर और तकनीकी कौशल भी सीखे जाएं तो युवाओं के लिए देश-विदेश में अवसरों के दरवाजे खुलते हैं। यह बात अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ व हज राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने मंगलवार को भाषा विश्वविद्यालय में अरबी विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के उद्घाटन अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि शिक्षा, हुनर और रोजगार के बेहतर अवसर हर वर्ग तक पहुंचें। सरकार मदरसों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भाषा शिक्षा को आधुनिक जरूरतों से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, शोधार्थियों और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
भाषा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. अनीस अंसारी ने कहा कि अरबी सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि इल्म, तहजीब और रूहानी विरासत की एक पूरी दुनिया है। अरबी के माध्यम से इस्लामी परंपरागत ग्रंथों के साथ ही खाड़ी देशों से जुड़े रोज़गार, व्यापार और कूटनीतिक अवसरों तक पहुंच बनती है। कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि भाषाओं के जरिये समाज में सहअस्तित्व और आपसी समझ को बढ़ावा देना विश्वविद्यालय का उद्देश्य है। सेमिनार संयोजक प्रो. मसूद आलम ने बताया कि इसमें तीन देशों के 15 से अधिक संस्थानों से 200 से ज्यादा विद्वान, शोधार्थी और छात्र भाग ले रहे हैं।