प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। फैजुल्लागंज में नाले की खोदाई में निकली डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक मिट्टी के घोटाले की परतें खुल गई हैं। इस मिट्टी को प्रॉपर्टी डीलर की जमीन पाटने में खपा दिया गया था। अमर उजाला के घोटाला उजागर करने के बाद हुई जांच में यह सामने आया है। प्रॉपर्टी डीलर की जमीन से अब नाले की मिट्टी खोदकर निकाली जाएगी। उस मिट्टी को अकबरनगर में बन रहे शक्तिवन में इस्तेमाल किया जाएगा।
फैजुल्लागंज में नाले की खोदाई से निकली करीब डेढ़ करोड़ की मिट्टी के घोटाले का मामला सामने आने के बाद भी ठेकेदार और इंजीनियर की करतूत को छिपाने की पूरी कोशिशें की जाती रहीं। मामले पर पर्दा डालने के लिए उन्हीं इंजीनियरों से जांच रिपोर्ट तैयार कराई गई, जो इसके लिए जिम्मेदार थे। यही नहीं सोशल मीडिया पर बिना नाम के उस रिपोर्ट को वायरल कराया गया, ताकि पूरे प्रकरण पर मिट्टी डाली जा सके। लेकिन यह सारी कोशिशें नाकाम हुईं और घोटाले की परतें एक-एक कर उधड़ गईं।
प्रॉपर्टी डीलर की जमीन को यार्ड बताया और वहीं पटवा दी मिट्टी
मिट्टी का घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया। खेल पकड़ में न आए इसलिए नाले की खोदाई से निकलने वाली मिट्टी को जमा करने के लिए ठेकेदार ने फैजुल्लागंज में ही सड़क किनारे की एक जमीन को यार्ड बनाया। कागजों पर भी उसे मिट्टी जमा करने के लिए यार्ड बताया गया। यहां पर एक हजार से अधिक ट्रक मिट्टी जमा की गई। बताया गया कि जहां जरूरत होगी, यहीं से मिट्टी ले जाई जाएगी। पर, बाद में यार्ड में ही मिट्टी को मशीनों से समतल कर दिया गया।
यार्ड का लेवल सड़क से काफी नीचे था
जानकारों ने बताया कि जिस जमीन पर यार्ड बनाया गया, उसका लेवल सड़क से काफी नीचे था। यह जमीन एक बिल्डर की है और उसे यहां पर काॅम्प्लेक्स और अपार्टमेंट बनाना है। ऐसे में उसे मिट्टी की पटाई करानी थी।
यह है पूरा मामला
हर साल बारिश में फैजुल्लागंज में बाढ़ जैसे हालात बनते हैं। इसको देखते हुए यहां पर करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से करीब 8.50 किमी लंबा नाला बनाने का काम एक साल पहले शुरू हुआ था। नाले को बनाने के लिए दो से ढाई मीटर गहराई और इतनी ही चौड़ाई में खोदाई की गई। खोदाई में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की मिट्टी निकली। यह मिट्टी न तो नगर निगम के पास है और न ही उसको इसका पैसा मिला। ठेकेदार कंपनी ही मिट्टी हजम कर गई। इसमें नगर निगम के इंजीनियरों की भी मिलीभगत रही।
घोटाले और हादसे के बाद भी बचाया जा रहा जिम्मेदारों को
नाला निर्माण के दौरान जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने में लापरवाही से दिवाली की रात बाइक सवार सीतापुर के रमनगरा बसखेर निवासी अंकित (24) की दायीं आंख के पास सरिया घुस गया था। केजीएमयू में आठ दिनों तक अंकित का इलाज चला लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। युवक की मौत और मिट्टी घोटाला सामने आने के बाद भी नगर निगम प्रशासन ने जिम्मेदार फर्म अजय बिल्डर्स, सहायक अभियंता विनोद पाठक और अवर अभियंता शनि विश्वकर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, जिम्मेदार कह रहे हैं कि मिट्टी को कुछ लोगों ने पाट लिया। सवाल उठता है कि अगर ऐसा था तो उन्होंने मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया?
कुछ लोगों ने यार्ड की मिट्टी पाट ली, अब वहां से खोदवाएंगे
मुख्य अभियंता, नगर निगम महेश वर्मा का कहना है कि मामले की जांच कराई गई है। पता चला कि जहां पर यार्ड में डाली गई मिट्टी को कुछ लोगों ने वहीं पाट दिया। अब वहां से मिट्टी खोदवाकर निकाली जाएगी और उसे अकबरनगर में बनने वाले शक्ति वन में पाटा जाएगा। यह पार्क नगर निगम को बनाना है और उसके लिए मिट्टी की जरूरत भी है। इसको लेकर ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं।